इंदौर-खंडवा मार्ग पर स्थित भेरूघाट रविवार को ट्रैफिक जाम का बड़ा केंद्र बन गया। दोपहर से शुरू हुआ जाम रात तक जारी रहा, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। छुट्टी का दिन होने और धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ी आवाजाही के कारण सड़क पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। हालात ऐसे बने कि कई लोगों को कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में कई घंटे लग गए।
जानकारी के अनुसार, जाम की स्थिति दोपहर करीब 12 बजे बननी शुरू हुई थी। धीरे-धीरे वाहनों की संख्या बढ़ती गई और देखते ही देखते लंबी कतारें लग गईं। सिमरोल से लेकर बाईग्राम के आगे तक करीब 11 किलोमीटर क्षेत्र में वाहन फंसे रहे। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों के साथ घंटों वाहनों में बैठे रहे। गर्मी और लंबे इंतजार के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन भारी ट्रैफिक के कारण स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगा।
भेरूघाट ट्रैफिक जाम की वजह क्या रही?
स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अनुसार, रविवार होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग इंदौर से महेश्वर, ओंकारेश्वर और ओखलेश्वर महादेव मंदिर की ओर निकले थे। इसी दौरान भेरूघाट पर वाहनों का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक हो गया। सड़क दो लेन की होने के बावजूद कई वाहन चालकों ने जल्दबाजी में ओवरटेक करने की कोशिश की। इससे सड़क पर अव्यवस्था बढ़ी और ट्रैफिक की रफ्तार लगभग थम गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी और घुमावदार मार्गों पर ट्रैफिक अनुशासन की कमी अक्सर जाम की बड़ी वजह बनती है। भेरूघाट में भी यही स्थिति देखने को मिली। एक वाहन के रुकने या खराब होने पर पीछे लंबी कतार लग जाती है। इसके अलावा भारी ट्रकों और छोटे वाहनों के एक साथ चलने से भी यातायात प्रभावित हुआ। स्थानीय लोग लंबे समय से इस मार्ग पर ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत करने और सड़क विस्तार की मांग कर रहे हैं।
वैकल्पिक रास्तों पर भी बढ़ी परेशानी
मुख्य मार्ग पर जाम बढ़ने के बाद कई वाहन चालकों ने भगोरा-कालाकुंड और तिंछाफाल के अंदरूनी रास्तों का सहारा लिया। हालांकि इन मार्गों की क्षमता सीमित होने के कारण वहां भी वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं। कच्चे रास्तों पर दबाव बढ़ने से कई वाहन खराब हो गए, जिससे लोगों को और दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मौकों पर वैकल्पिक मार्गों पर भी बेहतर व्यवस्था की जरूरत होती है। वहीं प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में ट्रैफिक प्रबंधन को और मजबूत किया जाएगा। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों और त्योहारों के दौरान पहले से ट्रैफिक प्लान तैयार करने से ऐसी स्थितियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
भेरूघाट में बार-बार लगने वाले जाम ने एक बार फिर सड़क ढांचे और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले पर्यटन और धार्मिक सीजन में यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।






