मालवा की दो बड़ी नगरी इंदौर और उज्जैन के बीच सफर अब पहले से तेज और आसान होने वाला है। लंबे समय से चर्चा में रही इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क परियोजना को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। 626 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी मिलने के बाद अब इस हाईवे का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के बाद अब प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। प्रशासन का कहना है कि 20 गांवों के 662 परिवारों को मुआवजा राशि मंजूर की जा चुकी है और जल्द ही वितरण की प्रक्रिया पूरी होगी।
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क एक नई और आधुनिक हाईवे परियोजना है, जिसे दोनों शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए तैयार किया जा रहा है। यह सड़क मौजूदा मार्ग से अलग नए ट्रैक पर बनेगी, ताकि यातायात का दबाव कम हो और यात्रा का समय घटे।
इस ग्रीनफील्ड हाईवे के बनने से इंदौर और उज्जैन के बीच आवागमन सुगम होगा। खासकर सिंहस्थ 2028 के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए यह सड़क बेहद अहम मानी जा रही है।
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क को लेकर पहले भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद सामने आए थे। लेकिन अब प्रशासन ने किसानों से चर्चा कर अधिकांश समस्याओं का समाधान कर लिया है।
626 करोड़ मुआवजा मंजूर, 20 गांवों के 662 परिवारों को राहत
इस परियोजना के तहत 20 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे की राशि को लेकर कई स्तर पर चर्चा और आपत्तियां आई थीं।
अब सरकार की ओर से 626 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर कर दिया गया है। प्रशासन के मुताबिक 662 खातेदारों के खाते में राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसानों ने भी मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता की सराहना की है।
उज्जैन जिले के किसानों ने कलेक्टर शिवम वर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया है। उनका कहना है कि उचित मुआवजा मिलने से उन्हें आर्थिक मजबूती मिलेगी और क्षेत्र का विकास भी होगा।
एलिवेटेड नहीं, जमीनी स्तर पर बनेगी सड़क
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया गया है। पहले यह प्रस्ताव था कि सड़क एलिवेटेड यानी ऊंचाई पर बनाई जाएगी। लेकिन किसानों की मांग और सुझाव के बाद इसे जमीनी स्तर पर बनाने का निर्णय लिया गया है।
कुछ समय पहले इंदौर और उज्जैन के किसानों ने भोपाल जाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की थी। किसानों का कहना था कि सड़क निर्माण में उनकी जमीन और भविष्य को ध्यान में रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इंदौर-उज्जैन क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा और किसानों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद सड़क को जमीनी स्तर पर बनाने का फैसला लिया गया।
सिंहस्थ 2028 को लेकर तेज हुई तैयारी
उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ महापर्व आयोजित होगा। इस आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क का महत्व और बढ़ जाता है।
प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि सिंहस्थ से पहले सड़क का निर्माण पूरा हो जाए, ताकि आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। बेहतर सड़क से यातायात सुगम होगा और जाम की समस्या कम होगी। सिंहस्थ के दौरान इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन तक आने वाले यात्रियों को इस ग्रीनफील्ड हाईवे से सीधा और तेज रास्ता मिलेगा।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बड़ा लाभ
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास की बड़ी कड़ी मानी जा रही है। इस हाईवे के बनने से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। दोनों शहरों के बीच व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। रियल एस्टेट और आसपास के गांवों में भी विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। किसानों को मुआवजा मिलने के साथ-साथ सड़क से जुड़ी अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।
जमीन अधिग्रहण विवाद का हुआ समाधान
भूमि अधिग्रहण को लेकर शुरुआत में कुछ गांवों में असंतोष था। किसानों का कहना था कि मुआवजा राशि और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं है। प्रशासन ने बैठकें कर, दस्तावेज जांच कर और पारदर्शी तरीके से प्रक्रिया पूरी की। अब ज्यादातर विवाद सुलझा लिए गए हैं। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन सड़क परियोजना में आ रही बाधाएं हटने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।






