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इंदौर में आवारा कुत्ते का आतंक, डॉक्टर समेत 40 से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार, दहशत में लोग

Written by:Bhawna Choubey
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इंदौर में एक आवारा कुत्ते ने अरविंदो अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में डॉक्टरों, नर्सों, मरीजों और राहगीरों समेत 40 से अधिक लोगों पर हमला कर दिया। इस घटना ने शहर में बढ़ती डॉग बाइट की घटनाओं और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

इंदौर में आवारा कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को शहर के अरविंदो अस्पताल और उसके आसपास के इलाकों में एक आक्रामक कुत्ते ने कई लोगों पर हमला कर दिया। कुछ ही घंटों में डॉक्टर, नर्स, मरीज, सिक्योरिटी गार्ड, स्टूडेंट्स और आम नागरिक समेत 40 से अधिक लोग इसका शिकार बन गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया और कई लोगों को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।

सुबह करीब 9 बजे यह कुत्ता अरविंदो अस्पताल परिसर में पहुंचा और सबसे पहले एक महिला डॉक्टर पर हमला किया। इसके बाद वह अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में घूमता रहा और सामने आने वाले लोगों को काटता गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, लेकिन कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

अस्पताल से कॉलेज और गांव तक फैल गया डर

घटना केवल अस्पताल परिसर तक सीमित नहीं रही। कुत्ते को जब अस्पताल क्षेत्र से बाहर निकाला गया तो वह एलएनसीटी कॉलेज, बरदरी गांव, रेवती रेंज और रेनेसां कॉलेज की ओर बढ़ गया। रास्ते में आने वाले लोगों पर भी उसने हमला किया। इस वजह से कई इलाकों में लोगों ने घरों और दुकानों से बाहर निकलने से भी परहेज किया।

घायलों में डॉक्टर, नर्स और मरीजों के अलावा स्मृति, अक्षिता, सचिन राजपूत, अंजनी शर्मा, सीमा, शोभा, परिणीता, कुसुम, प्रणव, गोविंदा, विष्णु, अफसर, राजीव और आर्यन जैसे कई स्थानीय लोग शामिल बताए गए हैं। कई घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को निगरानी में रखा गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। खास बात यह है कि यह घटना ऐसे समय हुई है जब शहर में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और नगर निगम की चुनौती

आंकड़ों के अनुसार इंदौर में हर महीने 5 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। इनमें करीब एक हजार बच्चे शामिल होते हैं। रोजाना औसतन 180 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आती है। यही वजह है कि यह समस्या अब केवल पशु प्रबंधन का नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है।

नगर निगम पिछले कई वर्षों से नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहा है। अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2013 से अब तक दो लाख से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके बावजूद सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नसबंदी अभियान पर्याप्त नहीं है, बल्कि शेल्टर होम, नियमित मॉनिटरिंग और आक्रामक कुत्तों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था भी जरूरी है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए स्थानीय निकायों को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई थी। इंदौर की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहर में आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा। फिलहाल लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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