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बांग्लादेश में आज 300 सीटों पर आम चुनाव, अवामी लीग के बिना 12.76 करोड़ वोटर डाल रहे वोट, 1981 उम्मीदवार मैदान में

Written by:Banshika Sharma
Published:
बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद आज (12 फरवरी, 2026) 13वें आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के बीच 300 सीटों के लिए 1981 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जहां 12.76 करोड़ मतदाता नई सरकार के साथ-साथ एक अहम जनमत संग्रह पर भी फैसला करेंगे।
बांग्लादेश में आज 300 सीटों पर आम चुनाव, अवामी लीग के बिना 12.76 करोड़ वोटर डाल रहे वोट, 1981 उम्मीदवार मैदान में

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार आम चुनाव के लिए आज गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को मतदान हो रहा है। देश की 300 संसदीय सीटों पर नई सरकार चुनने के लिए 12.76 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। यह चुनाव इस मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ पर प्रतिबंध के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है।

मतदान प्रक्रिया सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और शाम 4:30 बजे तक चलेगी। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू कर दी जाएगी। चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हो रहा है और विदेशों में बसे बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पोस्टल बैलेट की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत 8 लाख से ज्यादा पोस्टल बैलेट जारी किए गए हैं।

जनमत संग्रह और चुनाव एक साथ

इस आम चुनाव की एक और खास बात यह है कि इसके साथ-साथ एक जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है। मतदाताओं को संवैधानिक सुधारों (जुलाई चार्टर) के एक पैकेज पर ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब देना है। अगर जनमत संग्रह में ‘हां’ के पक्ष में अधिक वोट पड़ते हैं, तो बनने वाली नई सरकार इन सुधारों को संसद के माध्यम से कानूनी रूप से लागू करने के लिए बाध्य होगी।

युवा मतदाताओं पर टिका है भविष्य

इस चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका को सबसे अहम माना जा रहा है। कुल 12.76 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 5.6 करोड़ (56 मिलियन) वोटर 18 से 37 आयु वर्ग के हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 44 फीसदी हिस्सा है। इनमें लगभग 45.7 लाख मतदाता ऐसे हैं जो पहली बार वोट डाल रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि युवा वर्ग का झुकाव जिस भी गठबंधन की तरफ होगा, उसकी जीत की राह आसान हो जाएगी। गौरतलब है कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन का नेतृत्व छात्र और युवा संगठनों ने ही किया था, जिसके कारण देश में सत्ता परिवर्तन हुआ।

चुनावी मैदान का पूरा गणित

बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों पर सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 151 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। इन सीटों के अलावा, 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिनका आवंटन पार्टियों को मिले वोट शेयर के अनुपात में किया जाता है।

इस बार चुनाव मैदान में 59 राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार मिलाकर कुल 1,981 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कुल मतदाताओं में 6,47,60,382 पुरुष, 6,28,50,772 महिलाएं और 1,230 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।

‘दो रहमान’ के बीच सत्ता की लड़ाई

अवामी लीग की अनुपस्थिति में, बांग्लादेश की राजनीति दो प्रमुख गठबंधनों के इर्द-गिर्द सिमट गई है। एक तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का गठबंधन है, तो दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का 11 दलों वाला गठबंधन है।

BNP गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर तारिक रहमान का नाम सबसे आगे है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन ने शफीकुर रहमान को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसे बांग्लादेश की राजनीति में ‘दो बेगम’ के बाद अब ‘दो रहमान’ के बीच सत्ता के संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है।

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