
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अपना दावा ठोका है। बुधवार को दावोस में अपने भाषण के दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम बताया और कहा कि इसकी सुरक्षा अमेरिका के अलावा कोई और नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इसे हासिल करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
ट्रंप ने इस दौरान अपने सहयोगी देशों, खासकर डेनमार्क और NATO सदस्यों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने डेनमार्क को ‘एहसान फरामोश’ करार दिया और NATO की प्रतिबद्धता पर भी संदेह जताया।
‘ग्रीनलैंड पर हमारा हक, डेनमार्क एहसान फरामोश’
ट्रंप ने डेनमार्क की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपनी रक्षा करने में नाकाम रहा था और तब अमेरिका ने उसकी मदद की थी। उन्होंने कहा, “दूसरे विश्व युद्ध में डेनमार्क सिर्फ छह घंटे में जर्मनी से हार गया था। उस समय वह न तो अपनी और न ही ग्रीनलैंड की रक्षा कर सका। तब अमेरिका को आगे आकर ग्रीनलैंड की सुरक्षा करनी पड़ी।”
ट्रंप के अनुसार, युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क को लौटा दिया, जो एक बहुत बड़ी गलती थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है और इसलिए यह अमेरिका का इलाका है। इसकी रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है क्योंकि यह अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक अहम जगह पर स्थित है।
ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे
ग्रीनलैंड पर अपने इरादे साफ करते हुए ट्रंप ने पहली बार खुलकर कहा कि वह इसके लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे।
“अगर मैं चाहूं तो बहुत ज्यादा ताकत और सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर सकता हूं, तब हमें कोई रोक नहीं सकता। लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता। मैं बल प्रयोग नहीं करूंगा।” — डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आमतौर पर किसी से कुछ मांगता नहीं है और इसीलिए उसे कुछ मिलता भी नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने साथ जोड़ने पर तुरंत बातचीत शुरू करना चाहता है।
NATO और यूरोप पर भी उठाए सवाल
अपने भाषण में ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर भी संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें शक है कि अगर अमेरिका को कभी जरूरत पड़ी तो NATO उसकी मदद करेगा भी या नहीं। उन्होंने NATO के आर्टिकल 5 का जिक्र किया, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। ट्रंप ने कहा कि इस नियम का इस्तेमाल अब तक सिर्फ 9/11 हमलों के बाद अमेरिका की रक्षा के लिए हुआ है।
यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए ट्रंप ने इसकी जिम्मेदारी यूरोप पर डाल दी। उन्होंने कहा, “रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की जिम्मेदारी यूरोप की होनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका वहां से बहुत दूर है।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने दुनिया में युद्ध खत्म कराने के लिए बहुत पैसा और मेहनत खर्च की, लेकिन बदले में उसे सिर्फ तबाही और भारी खर्च मिला।
भाषण में फिसली जुबान
शेयर बाजार पर बोलते हुए ट्रंप की जुबान फिसल गई और उन्होंने ग्रीनलैंड की जगह आइसलैंड का नाम ले लिया। उन्होंने कहा, “कल हमारा शेयर बाजार पहली बार आइसलैंड की वजह से गिरा। आइसलैंड ने हमें पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है।”
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