जापान के मी प्रांत के तट के पास रविवार सुबह 6.0 तीव्रता का भूकंप आया। दरअसल अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक इसका केंद्र समुद्र में जमीन से करीब 352 किलोमीटर नीचे था। भूकंप का केंद्र प्रांत की राजधानी त्सु से लगभग 110 किलोमीटर दक्षिण में बताया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई और किसी के घायल होने या बड़े नुकसान की खबर भी सामने नहीं आई।

वहीं इस भूकंप के झटके कुछ इलाकों में महसूस किए गए। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) की वेबसाइट पर लोगों ने बताया कि शुरुआत में झटके हल्के थे लेकिन धीरे-धीरे उनकी तीव्रता महसूस होने लगी। कुछ लोगों के मुताबिक झटके काफी देर तक बने रहे। USGS के अनुसार, भूकंप का केंद्र त्सु से करीब 110 किलोमीटर दक्षिण में समुद्र के भीतर था। त्सु मी प्रांत की राजधानी है और यहां की आबादी 2.5 लाख से ज्यादा है।

सुनामी की चेतावनी नहीं

USGS के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 6.0 दर्ज की गई और इसका केंद्र जमीन के भीतर करीब 352 किलोमीटर की गहराई में था। यह एक गहरा भूकंप था। आम तौर पर भूकंप का असर केवल उसकी तीव्रता से तय नहीं होता बल्कि यह भी देखा जाता है कि उसका केंद्र कितनी गहराई में था और आसपास के इलाके उससे कितनी दूरी पर हैं। इसी वजह से एक जैसी तीव्रता वाले दो भूकंपों का अलग-अलग जगहों पर असर भी अलग हो सकता है। इस घटना के बाद सुनामी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में किसी के घायल होने या जान-माल के बड़े नुकसान की सूचना भी नहीं मिली है।

रिंग ऑफ फायर में होने से यहां आते रहते हैं भूकंप

दरअसल जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप की घटनाएं अक्सर होती हैं। इसकी बड़ी वजह देश की भौगोलिक स्थिति है। जापान प्रशांत महासागर के आसपास फैले भूकंपीय क्षेत्र ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ में आता है। यहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में हैं। इन प्लेटों की हलचल से जमीन के भीतर ऊर्जा जमा होती है और अचानक बाहर निकलने पर भूकंप आते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जापान में हर साल करीब 1,500 भूकंप दर्ज किए जाते हैं। इनमें से ज्यादातर हल्के होते हैं और उनसे बड़े नुकसान की खबर नहीं आती। लगातार भूकंप आने की वजह से वहां इमारतों को भूकंपरोधी बनाने, लोगों को आपात स्थिति के लिए तैयार रखने और बचाव से जुड़ी व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जाता है।

पहले भी बड़े भूकंप से हुआ भारी नुकसान

वहीं जापान में पहले भी कई बड़े भूकंप आ चुके हैं। साल 2024 में नोटो प्रायद्वीप में आए भूकंप में करीब 600 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद कई इलाकों में इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था। इससे पहले 11 मार्च 2011 को जापान में 9.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। इसके बाद उठी सुनामी ने बड़े इलाके में तबाही मचाई थी और 18 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।