वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की कथित कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने की खबरों के बीच न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी का एक अहम बयान सामने आया है। ममदानी ने अमेरिकी प्रशासन की इस योजना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क सिटी में ‘फेडरल कस्टडी’ में रखने की जानकारी दी गई है।
मेयर ममदानी ने इस पूरे घटनाक्रम को एक संप्रभु राष्ट्र पर ‘एकतरफा हमला’ करार दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई न केवल युद्ध की श्रेणी में आती है, बल्कि यह सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी संघीय कानूनों का उल्लंघन भी है।
“सत्ता परिवर्तन की ऐसी कोशिशों का असर सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव न्यूयॉर्क जैसे शहरों पर पड़ता है, जहां हजारों की संख्या में वेनेजुएला मूल के लोग रहते हैं।” — जोहरान ममदानी, मेयर, न्यूयॉर्क सिटी
भारत से जुड़े विवाद की यादें ताजा
वेनेजुएला मामले पर ममदानी की यह टिप्पणी इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि हाल ही में उनका नाम भारत से जुड़े एक विवाद में भी सामने आया था। 2 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क का मेयर पद संभालने के बाद, ममदानी ने दिल्ली हिंसा मामले में जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद को एक हस्तलिखित पत्र भेजा था।
इस पत्र में उन्होंने खालिद के प्रति एकजुटता व्यक्त की थी। जब यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो भारत के राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कई भारतीय नेताओं और संगठनों ने इसे भारत की न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया था। हालांकि, कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पूर्व राजनयिकों ने इसे उनकी निजी अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकार करार दिया था।
कूटनीतिक सीमाओं पर सवाल
भारत और अब वेनेजुएला—इन दो अलग-अलग मामलों ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी शहर के निर्वाचित मेयर को दूसरे देशों के आंतरिक और कूटनीतिक मामलों में इतनी मुखरता से दखल देना चाहिए? क्या यह केवल राजनीतिक राय है या इससे कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ता है?
फिलहाल, वेनेजुएला पर दिए गए ममदानी के बयान पर अमेरिकी फेडरल सरकार या वेनेजुएला की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, भारत सरकार ने भी उनके पुराने बयान पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की थी।





