जबलपुर में भारी बारिश, बरगी डैम के 13 गेट खोले गए, देखिये वीडियो

जबलपुर में भारी बारिश, बरगी डैम के 13 गेट खोले गए, देखिये वीडियो

जबलपुर, संदीप कुमार

रानी अवन्ति बाई लोधी सागर परियोजना बरगी बांध के जलस्तर को नियंत्रित करने मंगलवार को इसके 21 में से 13 स्पिल-वे गेट खोल दिए गए| गेट नम्बर पांच से गेट नम्बर 17 तक खोले गए हैं| बरगी बांध के इन जलद्वारों से 1 लाख 21 हजार 660 क्यूसेक पानी छोड़ा जायेगा। बांध के इन जलद्वारों के अलावा यहां स्थित जल विद्युत उत्पादन इकाइयों से भी 7,063 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है । बांध के गेट खोलते समय इसका जल स्तर 421.60 मीटर रिकार्ड किया गया था। यह इसके पूर्ण जलभराव स्तर 422.76 मीटर से मात्र 1.16 मीटर कम है । बांध के जलभराव क्षेत्र में इस समय करीब 1 लाख 96 हजार क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी ।

बरगी डैम से एक लाख 21 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इसे देखते हुए 8 जिलों को हाईअलर्ट कर दिया गया है, इसमें सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, सीहोर, खरगोन और कटनी जिले शामिल हैं| जबलपुर के कैचमेंट एरिया में हुई भारी बारिश के चलते बरगी डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके साथ जबलपुर में ग्वारी घाट और नर्मदा मंदिर समेत सभी घाट डूब गए हैं।

कार्यपालन यंत्री बरगी बांध अजय सूरे के अनुसार बांध में वर्षा जल की आवक को देखते हुये जल निकासी की मात्रा को कभी भी घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है । रानी अवन्ति बाई लोधी सागर परियोजना के अधीक्षण यंत्री डीएस ठाकुर ने बांध के निचले क्षेत्र के रहवासियों से सतर्क रहने तथा घाटों या डूब क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाये रखने का आग्रह किया है ।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews