लॉकडाउन में एक शख्स बेजुबान जानवरों को खिला रहा है खाना

लॉकडाउन में एक शख्स बेजुबान जानवरों को खिला रहा है खाना

जबलपुर/संदीप कुमार

हाल ही में सोशल मीडिया में केरल का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे की एक गर्भवती हाथी को फल में बम लगाकर खिला दिया जाता है जिसके चलते ब्लास्ट होता है और उसकी मौत हो जाती है। वायरल वीडियो की हर तरफ आलोचना हो रही है, लेकिन इसी दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी है जो लॉक डाउन के दौरान बेजुबान जानवरों का पेट भरने में लगे हुए है।

ये तस्वीर है जबलपुर के लमेहाटाघाट की जहाँ रहने वाले दिलीप भारती लॉक डाउन में बेजुबान जानवरों को खाना खिलाने का काम कर रहे हैं। दिलीप भारती कभी चने तो कभी फल बंदरों को खिला रहे हैं। ये करीब एक माह से बेजुबान जानवरों का पेट भरने का काम कर रहे है, अब तो बंदर सुबह होते ही दिलीप भारती के इंतजार में जुट जाते है और जब दिलीप उनके लिए भोजन लेकर आते है तो उन्हें घेर कर आसपास बैठ जाते है। नर्मदा किनारे लम्हेटाघाट में रहने वाले दिलीप भारती सिर्फ बंदरो को ही नही बल्कि मछलियों को भी रोजाना खाना खिलाते है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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