विकास दुबे एनकाउंटर पर भाजपा में भी उठे सवाल, नगर अध्यक्ष की पोस्ट ने मचाई खलबली

विकास दुबे एनकाउंटर पर भाजपा में भी उठे सवाल, नगर अध्यक्ष की पोस्ट ने मचाई खलबली

जबलपुर| संदीप कुमार| विकास दुबे एनकाउंटर मामले में अभी तक विपक्ष तो सवाल उठा ही रही था, लेकिन अब भाजपा के नुमाइंदों ने ही एनकाउंटर को कटघरे में ला खड़ा कर दिया है। जबलपुर नगर अध्यक्ष जी एस ठाकुर ने विकास दुबे एनकाउंटर पर सवाल खड़े करते हुए अपनी बातों को सोशल मीडिया में शेयर किया है।

क्या अब फैसले गोली से होंगे….
जिस तरह से विकास दुबे का एनकाउंटर किया गया है उसको लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के नगर अध्यक्ष जी एस ठाकुर ने भी एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर विकास दुबे ने अपराध किए थे तो उसका फैसला कानून करती पर जिस तरह से उज्जैन से कानपुर ले जाते समय विकास दुबे का एनकाउंटर पुलिस के द्वारा किया गया है यह कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

जी एस ठाकुर ने कहा कि इस देश का संविधान कहता है कि कितना भी बड़ा अपराधी हो उसका निर्णय करने का अधिकार कानून को होता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास दुबे के अपराधों को लेकर कानून निर्णय कर सकता था पर अपराधी का इस तरह से एनकाउंटर करना इसका मैं विरोध करता हूं, अगर विकास दुबे को सजा देनी थी तो कानून सजा देता ना कि पुलिस। वही उत्तर प्रदेश सरकार की बचाव में आते हुए जी एस ठाकुर ने कहा कि सरकार चाहे भाजपा की हो या अन्य राजनीतिक पार्टी की कोई भी सरकार पुलिस को एनकाउंटर करने का आदेश नहीं देती हैं ,पर चूँकि विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ है तो यह पूरा एनकाउंटर संदेह के घेरे में आ रहा है जिसकी की उच्च स्तरीय जांच भी होनी चाहिए।बहरहाल भाजपा नगर अध्यक्ष के सोशल मीडिया में डाले गए इस पोस्ट के बाद से खलबली मच गई है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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