लॉकडाउन के बीच नशीली दवाइयों के सौदागर गिरफ्तार, युवाओं को करते थे सप्लाई

लॉकडाउन के बीच नशीली दवाइयों के सौदागर गिरफ्तार, युवाओं को करते थे सप्लाई

जबलपुर| संदीप कुमार| कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जहाँ जबलपुर का पुलिस प्रशासन इस बीमारी से निपटने की तैयारी में लगा हुआ है तो वही दूसरी और कुछ लोग पुलिस की व्यस्तता के फायदा उठा कर नशे का कारोबार करने में जुटे थे जिन पर हनुमानताल थाना पुलिस ने कार्यवाही की है।

मुखबिर की सूचना पर मारा छापा,नशीली दवाई की बरामद…..
लॉक डाउन के चलते पूरे शहर में शराब-गांजे की दूकान बन्द है।लोगो को नशे का कुछ साधन नही मिल रहा है जिसका फायदा उठाकर आरोपी समीम और वीरेश युवाओं को ऊंचे दामो पर नशे की दवा सप्लाई कर रहे थे।सीएसपी अखिलेश गौर के नेतृत्व में हनुमानताल थाना पुलिस ने इलाके में छापा मारते हुए दो आरोपियों से एलरविल,एविल और ट्रामाटॉस की 500 नग दवाई के साथ साथ 75 डिस्पोजल सिरिंज बरामद की।

शराब की दूकाने बंद तो दवाई के नशे का फैला था कारोबार…..
जबलपुर में कोरोना वायरस के चलते बीते 21 मांर्च से लॉक डाउन है यही वजह है कि राज्य सरकार के निर्देश पर कुछ दिन बाद ही जिले भर की शराब दूकाने भी बंद हो गई जिसका फायदा आरोपियों ने उठाया और युवाओं को मुँहमाँगे दामो पर नशे की दवाई बेच रहे थे।

पूछताछ में होगा बड़ा खुलासा-मेडिकल स्टोर संचालक भी होगा आरोपियों का साथी….
पुलिस गिरफ्त में आए दोनो आरोपियों से पुलिस पूछताछ करेगी।पुलिस को अंदेशा है कि इतनी बड़ी मात्रा में आरोपियों को ये दवाएं कहाँ से मिल रही है ये जाँच का विषय है हो सकता है आरोपियों के साथ कोई मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हो।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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