लॉकडाउन के बीच यहां ‘कोरोना दानव’ कर रहा लोगों को जागरूक

लॉकडाउन के बीच यहां ‘कोरोना दानव’ कर रहा लोगों को जागरूक

जबलपुर| संदीप कुमार| संस्करधानी जबलपुर में यू तो हर तीज त्योहार में मूर्तियों की स्थापना होती है।दुर्गानवमी,होली,गणेश चतुर्थी सहित धार्मिको पर्वो में मूर्ति स्थापना का चलन वर्षो पुराना है।पर हाल ही में जबलपुर में एक पुतले की स्थापना की गई है जिसका मकसद लोगो को जागरूक करने का|

जबलपुर पुलिस ने शहर के गोरखपुर इलाके में कोरोना वायरस का एक बड़ा का पुतला बनवाया है।इस पुतले की शक्ल को हूँ ब हूँ राक्षस की शक्ल दी है और इसके सामने लिखा हुआ है, ‘मैं हूं कोरोना’।इस पुतले को पुलिस अब शहर के अलग-अलग चौराहों पर अलग-अलग दिन खड़ा किया करेगी और लोगों को यह समझाइश दी जाएगी कि बाहर कॅरोना रूपी दनाव खड़ा हुआ है जो आपको नुकसान पहुँचा सकता है इसलिए घरों से न निकले।

इस पुतले के शहर के हर स्थानों में घुमाकर यह बताया जा रहा है कि सड़कों पर ना निकलें.सड़कों पर इस समय यह वायरस घूम रहा है. घरों में ही रहे, नहीं तो उन्हें यह वायरस पकड़ लेगा. कोरोना वायरस का यह पुतला जबलपुर में सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. पुलिस का कहना है कि, लोगों को समझाने के लिए यह एक अच्छा माध्यम है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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