Lockdown में कलाकार घरों में हुए लॉक, SaReGaMa Winner ईशिता के कई शो हुए कैंसल

Lockdown में कलाकार घरों में हुए लॉक, SaReGaMa Winner ईशिता के कई शो हुए कैंसल

जबलपुर।संदीप कुमार

लॉकडाउन भले ही खुल गया हो पर अभी भी कलाकारों को लॉक डाउन में राहत नहीं मिली है लिहाजा कलाकार आज भी अपने आप को घरों में ही लॉक किए हुए हैं।बात करे टीवीएस सारेगामा ईशिता विश्वकर्मा की तो वह भी अपने आप को ढाई माह से घर में लॉक हैं। लॉक डाउन खुल चुका है पर कलाकारों का स्टेज शो और अन्य कार्यक्रमों के लिए सरकार ने अनुमति नहीं दी है।

ऐसे में सिंगर इशिता विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने कैसे अपने ढाई माह को गुजारा।ईशिता विश्कर्मा की माने तो कोरोना काल मे ढाई माह उनकी प्रैक्टिस के लिए बहुत ही कारगर साबित हुआ है हालांकि उनके बहुत सारे शो भी तहोने थे पर लॉकडाउन के चलते उनके पूरे कार्यक्रमों को स्थगित करना पड़ा।ईशिता विश्वकर्मा अपनी मां तेजल विश्वकर्मा के साथ घर पर ही रियाज कर रही थी उन्होंने बताया कि यह ढाई माह लॉक डाउन का पीरियड बहुत ही लंबा बीता था पर अच्छी बात यह भी थी कि इन ढाई माह के दौरान उन्हें प्रैक्टिस करने का पर्याप्त समय मिला।

ईशिता विश्वकर्मा की मां तेजल विश्वकर्मा भी अपनी बेटी के साथ मिलकर लगातार उनका साथ दे रही है। दोनों ही मां बेटी मिलकर साथ मे रियाज करते है।ईशिता विश्कर्मा की मां भी गायक है लिहाजा उन्होंने तमाम गायकों की तरफ से सरकार से गुहार लगाई है कि कोरोना काल में उन गायकों पर सरकार ध्यान दें जिनका घर और परिवार स्टेज शो की कारण चलता है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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