महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी पर गरमाई सियासत, बीजेपी-कांग्रेस आई आमने-सामने

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी पर गरमाई सियासत, बीजेपी-कांग्रेस आई आमने-सामने

संदीप कुमार/जबलपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर अब राजनीति शुरू हो गई है। बीजेपी कांग्रेस दोनों तरफ से वार-पलटवार जारी है। मध्यप्रदेश के पंचायत मंत्री कमलेस्वर पटेल ने जहाँ केंद्र की मोदी सरकार पर बजट न देने का आरोप लगाया तो वही बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर जनता को  गुमराह करने की बात कही। मध्यप्रदेश के पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल की माने तो वर्तमान में देश की केंद्र सरकार है वह मध्य प्रदेश सरकार के साथ लगातार दुर्व्यवहार कर रही है।केंद्र सरकार ने 14000 करोड़ रुपए की बजट में कटौती की है जो कि कहीं से भी उचित नहीं है। पंचायत मंत्री ने ये भी कहा कि केंद्र सरकार  मध्य प्रदेश की जनता के अधिकारों में डाका डाल रही है। देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को इस विषय मे जल्द विचार करना चाहिए और मध्य प्रदेश के हिस्से की राशि देना चाहिए। पंचायत मंत्री ने कहा कि आज रोजगार गारंटी योजना का 3 महीने से करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। जिसके चलते मजदूरों का भुगतान नहीं हो पा रहा है और  जिसके कारण सारे काम प्रभावित हो रहे हैं। इसमे केंद्र की सरकार को विचार करना चाहिए। वहीं बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश की सरकार गलत आंकड़ो और अधूरी जानकारियों के आधार पर प्रदेश की जनता को भ्रमित करने  का काम कर रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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