एसआई पर युवक की बर्बरता से पिटाई का आरोप, एसपी तक पहुंची शिकायत

एसआई पर युवक की बर्बरता से पिटाई का आरोप, एसपी तक पहुंची शिकायत

जबलपुर|
मध्य प्रदेश की जबलपुर पुलिस का तालिबानी चेहरा सामने आया है जहाँ थाना शहपुरा में पदस्थ एक सब इंस्पेक्टर ने मात्र शक के आधार पर एक युवक की जमकर पिटाई की।इधर जब यह पूरा मामला एसपी अमित सिंह के संज्ञान में पहुँचा तो उन्होंने जांच के निर्देश दिये है।पीड़ित युवक का आरोप है कि सब इंस्पेक्टर हेमंत यादव में मझ शक के आधार पर बर्बरता से उसकी पिटाई की है।ग्राम घाना निवासी रविन्द्र सिंह की माने तो सब इंस्पेक्टर हेमंत यादव अपने स्टाफ के साथ उसके बाजार पहुँचा और यह कहकर उसे साथ ले गया कि कुछ बात करनी है जिसके बाद रविन्द्र सिंह को थाना लेकर आया गया जहाँ उसके साथ जमकर मारपीट की।पुलिस ने तब तक उसे मारा जब तक कि वह बेहोश नही हो गया।दर्शल पुलिस को शक था कि रविन्द्र सिंह जुआ खिलाता है इसी शक पर उसे पीटा गया।पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि शहपुरा पुलिस रेत माफिया,शराब माफियाओ को छोड़ कर आम जन को परेशान कर रही है।शहपुरा पुलिस ने रविन्द्र के साथ मारपीट करते हुए उससे रु तक छीन लिए।अपनी फरियाद लेकर पुलिस अधीक्षक अमित सिंह के पास पहुचे रविन्द्र सिंह ने अपनी तकलीफ बयां की जिसके बाद तत्काल कार्यवाही और जांच का आश्वासन दिया गया है।

गौरतलब है कि शहपुरा पुलिस इन दिनों अपने कारनामों को लेकर कुछ ज्यादा ही चर्चित है कभी रेत माफियाओ से रु वसूलना तो कभी अवैध शराबियो से हाथ मिलाना।बहरहाल अब देखना होगा कि रविन्द्र सिंह की शिकायत पर क्या कार्यवाही पुलिस कर्मियों पर होती है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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