वकील का चालान काटना थाना प्रभारी को पड़ गया भारी

वकील का चालान काटना थाना प्रभारी को पड़ गया भारी

जबलपुर: अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने सुना होगा लेकिन थाना प्रभारी के खिलाफ उसी के थाने में केस दर्ज हो जाए ये आपने नहीं सुना होगा। लेकिन ये हकीकत है जबलपुर में एक वकील ने थाना प्रभारी सहित दो पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया।

क्या है पूरा मामला

मदन महल थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मी वाहन चेकिंग कर रहे थे इसी दौरान बिना हेलमेट बाइक चला रहे वकील संदीप माली को पुलिसकर्मियों ने रोका और चालान काट दिया। वकील का चालान कटने के बाद वकील भड़क गया और पुलिसकर्मियों से जमकर कहासुनी हुई जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने वकील को थाने लेकर आए। वकील संदीप का आरोप है की थाना प्रभारी संदीप अयाची ने उनके साथ थाने में जमकर मारपीट की और उन्हें थाने में बंद कर दिया। जिसके बाद जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक अपने साथियों के साथ मदन महल थाने पहुंचे और उन्होंने जमकर हंगामा किया और तीनों दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने की मांग की. हंगामा बढ़ने पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मी मीनाक्षी शुक्ला और हेमराज को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया और थाना प्रभारी को संदीप अयाची को नोटिस जारी किया बाद में वकील संदीप माली ने थाना प्रभारी और दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ उन्हीं के थाने में एफआईआर दर्ज कराई.जबलपुर का यह पहला मामला है जब किसी थाना प्रभारी पर उसी के थाने में उसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हो.

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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