फर्जीवाड़ा कर रेलवे में नौकरी करने वाले दो युवकों को सीबीआई ने किया गिरफ्तार, बिहार के रहने वाले हैं आरोपी

अक्टूबर 2025 में ट्रेनिंग के लिए मुकेश कुमार को प्रयागराज भेज दिया गया। रेलवे में जब बायोमेट्रिक के जरिए जांच की तो मुकेश कुमार का फर्जीवाड़ा सामने आ गया।
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रेलवे में फर्जीवाड़ा और जालसाजी करते हुए नौकरी पाने वाले दो युवकों को जबलपुर सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार किया है। दोनों युवक बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले है, जिन्होंने नौकरी पाने की सारी हदें पार कर दी थी। दोनों युवकों के बीच नौकरी को लेकर 6 लाख रुपए का सौदा हुआ था। जबलपुर सीबीआई ने धोखाधड़ी और जालसाजी करने वाले दोनों आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार कर जबलपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे ने 2024 में अलग-अलग पदों के लिए करीब 8 हजार से अधिक भर्तीयां निकली थी, जिसमें देश भर से अभ्यार्थी शामिल हुए थे। मुंगेर निवासी मुकेश कुमार ने फार्म भरा। पड़ोस का ही रंजीत कुमार जो कोचिंग पढ़ाया करता है, उससे संपर्क किया। पहले तो वह तैयार नहीं हुआ। बाद में मुकेश ने डील किया कि अगर उसकी नौकरी लग जाती है, तो 6 लाख रुपए कैश देगा।

सिंतबर 2025 में रेलवे में ज्वाइनिंग 

मुकेश कुमार की टेक्नीशियन के पद पर नौकरी लग चुकी थी। इस दौरान 12 जुलाई 2025 को रेलवे में रोजगार मेला, जिसमें शामिल होने के लिए मुकेश कुमार पहुंचा। सिंतबर 2025 में उसकी ज्वाइनिंग हो गई। रेलवे में नौकरी करने के दौरान मुकेश कुमार ने दमोह,सागर और जबलपुर में काम किया।

बायोमेट्रिक से पकड़ आया मुकेश का फर्जीवाड़ा 

अक्टूबर 2025 में ट्रेनिंग के लिए मुकेश कुमार को प्रयागराज भेज दिया गया। रेलवे में जब बायोमेट्रिक के जरिए जांच की तो मुकेश कुमार का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जबलपुर मंडल कीओर से इस फर्जीवाड़े में सीबीआई को लिखित में शिकायत दी गई, जिसके बाद 2 दिसंबर 2025 को मुकेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जबलपुर सीबीआई की टीम ने दोनों ही आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार करने के बाद जबलपुर लेकर आए जहां कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें वहां से जेल भेज दिया।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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