मंदिर की दीवार तोड़ने को लेकर हुआ प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने घेरा जीएम का बंगला

मंदिर की दीवार तोड़ने को लेकर हुआ प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने घेरा जीएम का बंगला

जबलपुर,संदीप कुमार। कटनी रेल्वे स्टेशन के पास 90 साल पुराने मंदिर की दीवार तोड़ने के आदेश से खफा हिन्दू संगठनों के सेकड़ो कार्यकर्ताओं ने पश्चिम मध्य रेल्वे के जीएम का बंगला घेरने की कोशिश की,इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से हल्की झड़प भी हुई।प्रदर्शन कर रहे करीब 100 हिन्दू सेवा के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।दर्शल कटनी रेल्वे स्टेशन के पास करीब 90 साल पुराने मंदिर की दीवार तोड़ने के आदेश पश्चिम मध्य रेल्वे के जनरल मैनेजर ने दिए है। इस आदेश से हिन्दू कार्यकर्ता बेहद ही नाराज है, यही कारण है कि आज दोपहर करीब 100 लोगों ने जीएम बंगले का घेराव करने की कोशिश की।

बेरिकेट लगाकर प्रदर्शनकरियो को रोकने तैयार थी पुलिस

जीएम बंगले का घेराव करने जा रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहले से ही पचपेड़ी में भारी पुलिस बल तैनात थी। बंगले का घेराव करने जा रहे प्रदर्शनकारियों को पहले तो पुलिस ने रोकने की कोशिश की पर जब यह लोग नहीं माने तो पुलिस ने इन्हें पर हल्का बल प्रयोग कर खदेड़ दिया। इस दौरान पुलिस ने 100 लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

शहर की शांति व्यवस्था बिगाड़ने पर हुई प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

एसडीएम मनिंद्र सिंह की माने तो जबलपुर शहर में रोजाना कोरोना विस्फोट हो रहा है। इसके बाद भी इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का भीड़ एकत्रित कर प्रदर्शन करना शहर की शांति व्यवस्था को बिगाड़ सकता है। लिहाजा इन तमाम लोगों को गिरफ्तार करने के बाद इन पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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