धार भोजशाला विवाद लंबे समय से मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय रहा है। हर सुनवाई के साथ लोगों की उत्सुकता बढ़ जाती है, क्योंकि यह मामला आस्था, इतिहास और कानून तीनों से जुड़ा हुआ है। हाल ही में हुई घटनाओं के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई जबलपुर में तय हो गई है।
पिछली सुनवाई में कुछ तकनीकी कारणों से मामला आगे नहीं बढ़ सका था, लेकिन अब सुनवाई की नई तारीख तय होते ही दोनों पक्षों की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं। सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दावों के बीच यह सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है।
क्यों जबलपुर हाईकोर्ट में शिफ्ट हुई धार भोजशाला मामले की सुनवाई?
इस मामले में पहले सुनवाई इंदौर पीठ में हो रही थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद प्रक्रिया में बदलाव हुआ और अब सुनवाई जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में की जाएगी।
इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया गया है, ताकि सुनवाई उचित पीठ के सामने हो सके और मामले का निष्पक्ष समाधान निकल सके। अब यह मामला जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में सुना जाएगा, जिससे सुनवाई की दिशा और गति दोनों बदल सकती हैं।
किन न्यायाधीशों के सामने होगी सुनवाई?
अब इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संज़ीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सर्राफ की खंडपीठ के सामने होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य पीठ में सुनवाई होने से मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। दोनों पक्षों के वकील अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे और कोर्ट आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
सर्वे रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई मामले की अहमियत?
मामले में पहले अदालत के आदेश पर विवादित परिसर का विस्तृत सर्वे कराया गया था। इस सर्वे के दौरान परिसर के कई हिस्सों में खुदाई भी की गई और वहां से मिले अवशेषों को दस्तावेज़ किया गया।
यह पूरा सर्वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की निगरानी में हुआ। बाद में संस्था ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंप दी। अब यही रिपोर्ट आगे की सुनवाई में अहम भूमिका निभा सकती है।
आखिर विवाद है किस बात का?
धार भोजशाला परिसर को लेकर दोनों समुदायों के अलग-अलग दावे हैं। एक पक्ष का कहना है कि यह स्थान माता वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर रहा है। वहीं दूसरा पक्ष इसे 11वीं सदी की कमाल मौला मस्जिद बताता है।
फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार, यहां हर मंगलवार हिंदू समाज को पूजा की अनुमति है और शुक्रवार को मुस्लिम समाज नमाज अदा करता है। इसी व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं।
सुनवाई टलने से क्यों बढ़ी बेचैनी?
कुछ दिन पहले जब मामले की सुनवाई इंदौर में होनी थी, उस समय वकीलों की संख्या पूरी न होने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इससे दोनों पक्षों में निराशा देखी गई। अब नई तारीख तय होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि अदालत में पूरे तर्कों के साथ सुनवाई होगी और आगे का रास्ता साफ हो सकेगा।





