दीपावली को लेकर रेलवे स्टेशनों के लिए अलर्ट, जबलपुर में खतरनाक पटाखों के साथ दो युवक हिरासत में

रेलवे स्टेशनों पर पटाखे लेकर आना जाना प्रतिबंधित है, रेलवे अधिनियम की धाराओं में ये दंडनीय अपराध है, आरपीएफ ने पटाखे ले जा रहे दो युवकों को रेलवे स्टेशन से कड़ा है।
two youths detained with firecrackers in Jabalpur

two youths detained with firecrackers in Jabalpur

दीपावली को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है, रेलेव स्टेशनों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। स्टेशन पर संदिग्ध और ज्वलनशील पटाखों को भी लाने-ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस बीच गुरुवार को आरपीएफ की टीम जब “डॉग सिम्हा” के साथ प्लेटफार्म नंबर 1 पर सर्चिंग कर रही थी उसी दौरान सिम्हा को कुछ संदिग्ध वस्तु दिखाई दी उसने हैंडलर को इशारा किया और दो व्यक्तियों के बैग की जब तलाशी ली तो उसमें खतरनाक पटाखे भरे निकले।

दरअसल आरपीएफ की टीम मदनमहल में डॉग दस्ता के साथ त्यौहारी सीजन के दृष्टिगत रेलवे स्टेशन मदनमहल पर यात्रियों एवं उनके सामान की सघन चेकिंग कर रही थी । इसी दौरान डॉग ने अपनी सूंघने की अद्भुत क्षमता एवं सतर्कता का परिचय देते हुए प्लेटफार्म क्रमांक 01 पर दो यात्रियों के बैग की ओर विशेष संकेत किया। श्वान सिम्हा के संकेत के आधार पर बैग की जांच करने पर उसमें बड़ी मात्रा में खतरनाक एवं ज्वलनशील पटाखे बरामद हुए, जिनका रेल द्वारा यात्रियों के बीच परिवहन प्रतिबंधित है।

दो युवकों को पटाखों के साथ पकड़ा

आरपीएफ ने डॉग का इशारा मिलने के बाद जब बैग लिए जा रहे युवकों को रोका तो वे हड़बड़ा गए, पुलिस ने उनसे बैग की जन जाँच की तो उसमें खतरनाक पटाखे भरे निकले, पुलिस ने दोनों युवकों अमित कुमार कोरी निवासी गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर एवं रोशन साहू निवासी गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर को पकड़ लिया।

“डॉग सिम्हा” की महत्वपूर्ण भूमिका रही

पुलिस ने युवकों से 9,800/- रुपये कीमत के पटाखे जब्त किये,  इस कार्रवाई में डॉग सिम्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके सटीक एवं समयबद्ध संकेत से खतरनाक ज्वलनशील सामग्री का पता लगाकर उसे रेल परिसर में आगे परिवहन होने से रोका जा सका। दोनों आरोपियों के विरुद्ध धारा 164 रेल अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है।

वंदना झा की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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