जबलपुर: रेलवे स्टेशन पर बिना मास्क काम कर रहे कर्मचारी, ठेकेदार-सुपरवाइजर बेफिक्र

जबलपुर: रेलवे स्टेशन पर बिना मास्क काम कर रहे कर्मचारी, ठेकेदार-सुपरवाइजर बेफिक्र

जबलपुर।संदीप कुमार।
पूरा देश इन दिनों कोरोना वायरस जैसी घातक बीमारी से लड़ रहा है।भारत सरकार सहित स्तानीय जिला प्रशासन भी सतर्कता बरतने की बार बार गुजारिश भी कर रहा है।वही दूसरी और रेल्वे की लापरवाही कोरोना वायरस को लेकर सामने आई है।जबलपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन में सफाई कर्मी बिना मास्क लगाए हुए सफाई का काम कर रहे है।कर्मचारियों ने कई बार ठेकेदार और सुपरवाइजर के द्वारा मांगने के बाद भी उन्हें मास्क नहीं दिए जा रहे है।जानकारी के मुताबिक एक और जहां पूरे भारत में कोरोना वायरस को लेकर हाहाकार मचा है वहीं जबलपुर स्टेशन पर सफाई ठेकेदार सफाई कर्मियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

दिन रात 24 घंटे सफाई कर रहे सफाई कर्मी मास्क और सेटेलाइजर को तरस रहे है। उन्होंने कई बार सुपरवाइजर से मांग भी की लेकिन ठेकेदारों ने देने से मना कर दिया।कर्मचारियों को सुपरवाइजर ने दो टूक में ये कहा कि आप खुद अपने पैसो से खरीद लो।इधर सफाई कर्मियों का कहना था कि इतना कम वेतन मिलने पर जहां उनका और परिवार का पालन पोषण नहीं हो रहा है वहीँ कोरोना से बचाव करने के लिए अतिरिक्त भार ना इंसाफी है। चौबीस घंटे गंदगी के बीच रहने से हमारी जिंदगी खतरे में है।हालांकि जब हमने इस पूरे मामले में रेल्वे के आला अधिकारियों से बात की तो उन्होंने इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए ठेकेदारों से इस विषय मे बात करने की बात कही है।

[covid19 style=”5″ country=”India” title=”भारत मे अभी तक”]

[covid19 style=”5″ title=”दुनिया मे अभी तक”]

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews