सूअरों के शिकार के लिए बिछाये बिजली के तार में फंसा किसान, करंट लगने से मौत

सूअरों के शिकार के लिए बिछाये बिजली के तार में फंसा किसान, करंट लगने से मौत

जबलपुर, संदीप कुमार| Jabalpur News जानवरो के शिकार करने के लिए लगाए गए करंट (Current) में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई| मृतक युवक का नाम मोहन पटेल बताया जा रहा है जो कि अपने खेत की सीमा के पास घूम रहा था कि अचानक ही उसे जोरदार करंट लगा और वो वही गिर गया | घटना के कुछ देर बाद ग्रमीण पहुँचे ओर उसे नजदीकी अस्पताल (Hospital) गए जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया|

जंगली सूअरों के लिए लगाया गया था करंट
बताया जा रहा है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने खेत पर जंगली सूअरो को पकड़ने के लिए करंट लगाया था,आज जैसे ही मोहन पटेल खेत के पास घूम रहा था तभी उसका पैर वहां बिछे करंट के तार में लगा और हुआ है उसकी चपेट में आ गया | आनन-फानन में मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने उसे इलाज के लिए सिहोरा अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया| बताया यह भी जा रहा है कि खेत के पास इन दिनों जंगली सूअरों का जमावड़ा देखा जा रहा था जिसके शिकार के लिए गांव के कुछ लोगों ने करंट बिछाया था और इसी करंट की चपेट में मोहन पटेल भी आ गया।

आरोपियों ने मोहन पटेल के शव को रख दिया था खेत के पास स्थित कुएं के पास
मोहन पटेल की मौत की सूचना जैसे ही सिहोरा थाना पुलिस को लगी तो वह भी मौके पर पहुंच गए लिहाजा पुलिस की जांच में पाया गया कि जिस समय मोहन को खेत में तार से करंट लगा था और उसकी मौत हो गई थी तो उस समय कुछ और लोग भी खेत में ही मौजूद थे।मोहन पटेल की मौत छुपाने के लिए उसके शव को कुए के पास रख दिया था। फिलहाल सिहोरा थाना पुलिस ने शव का पंचनामा कर जांच में जुट गई है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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