नन्हें कलाकार दिव्यांश से सुनिये कविता- “कोरोना को मार भगाएं”

नन्हें कलाकार दिव्यांश से सुनिये कविता- “कोरोना को मार भगाएं”

जबलपुर

छुटकू कवि दिव्यांश कुशवाहा अब अपने दादाजी की कविता के जरिये कोरोना के खतरे से आगाह करते हुए सभी से सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं। बता दें कि जबलपुर के DPS स्कूल में क्लास 4 के छात्र दिव्यांश ने अपने दादाजी, जो एक जाने माने कवि-साहित्यकार हैं, उनकी लिखी कविताओं का पाठ करते हैं। इनके वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। इसी कड़ी में आज उन्होने ‘कोरोना को मार भगाएं’ कविता का पाठ किया है।

दिव्यांश के दादाजी श्री सुरेश तन्मय वरिष्ठ कवि-कहानीकार हैं और उनकी लिखी लघुकथा महाराष्ट्र पाठ्यक्रम की कक्षा 9वीं में पढ़ाई भी जा रही है। अपने दादाजी के नक्शे कदम पर चलते हुए दिव्यांश भी खूब तुकबंदी करते हैं और अपने दादाजी की कविताओं का पाठ भी करते हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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