नर्मदा किनारे मियावाकी पद्धति से तैयार हो रहा जंगल, नाम दिया “नमो उपवन”, माँ शब्द का दिया आकार, करीब 7 हजार पौधों का रोपण

जबलपुर प्रशासन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मदिन पर दिए इस तोहफे में उनकी माँ को भी श्रद्धांजलि दी है, इस जंगल को माँ शब्द नाम की तरह बनाया गया है, जब पौधे वृक्ष का आकार लेंगे तो इसकी तस्वीर और भी खूबसूरत होगी।
Namo Upvan Jabalpur

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में नर्मदा किनारे जिला प्रशासन ने अनूठी पहल की है। नर्मदा किनारे ग्राम सगडा झपनी में मियावाकी पद्धति से जंगल तैयार किया जा रहा है, जिसका नाम “नमो उपवन” रखा गया है। माँ नर्मदा के किनारे बसे जनपद पंचायत जबलपुर के ग्राम पंचायत सगडा झपनी में मियावाकी पद्धति से कुल 6 हजार 990 पौधो का पौधारोपण किया गया है। विशेष बात ये है कि जंगल में माँ के आकार को भी प्रदर्शित किया गया है जिसमें पौधे रोप गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आज 17 सितम्बर को जबलपुर में नर्मदा परिक्रमा पथ पर परिक्रमा वासियों के आश्रय स्थल के लिये चिन्हित भूमि में से करीब 26 हजार वर्गफुट पर विकसित किये जा रहे “नमो उपवन” में आज सेवा पखवाड़ा के पहले दिन पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधायक नीरज सिंह, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गेहलोत तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

26 हजार वर्ग फीट में रोपे जा रहे 6 हजार 990 पौधे

ग्राम सगड़ा झपनी में नमो उपवन का निर्माण नर्मदा परिक्रमावासी के आश्रय के लिये चिन्हित आश्रय स्थल के पास पहाड़ी पर बनाया जा रहा है। कुल सात एकड़ के इस पूरे क्षेत्र में तार फेंसिंग कर दी गई है। इसमें से 26 हजार वर्ग फीट में मियावाकी तकनीक से कुल 6 हजार 990 पौधे रोपे जा रहे हैं।

नमो उपवन में लगाये गए ये पौधे 

इन पौधों में सीताफल, नीम, जामुन, आम, अर्जुन, गुलमोहर, इमली, कदम, गुलर, शीशम प्रजाति के 2 हजार 330 पौधे, कचनार, झारूल, करंजी, आवंला, मौलश्री, अमलतास, कनेर (पीला), टीकोमा, बाटलब्रश, बेल प्रजाति के 2 हजार 330 पौधे तथा चांदनी, चमेली, मधुकामनी, कनेर (लाल), मोगरा, मेंहदी, गंधराज, मधुमालती, कलिंद्रा, देसीरोज प्रजाति के भी 2 हजार 330 पौधे और कुल 6 हजार 990 पौधे रोपित किये जा रहे हैं। इस जंगल को मां शब्द नाम की तरह बनाया गया है, जब पौधे वृक्ष का आकार लेंगे तो इसकी तस्वीर और भी खूबसूरत होगी।

क्या है मियावाकी पद्धति

मियावाकी पद्धति एक वैज्ञानिक पौधारोपण तकनीक है, जिसे जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी ने विकसित किया। इस पद्धति का उद्देश्य प्राकृतिक वनों की तरह घने, आत्मनिर्भर और जैव विविधता से परिपूर्ण जंगल तैयार करना है। इस पद्धति में भूमि की गहरी खुदाई कर उसमें जैविक खाद, गोबर खाद और कम्पोस्ट मिलाया जाता है। फिर 3 पौधे प्रति वर्ग मीटर की घनत्व से विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। नियमित सिंचाई, मल्चिंग और रखरखाव के कारण 2-3 वर्षों में पौधे पूरी तरह विकसित होकर घना जंगल तैयार कर देते हैं।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट 

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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