पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया की अचानक बिगड़ी तबियत, अस्पताल में भर्ती

पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया की अचानक बिगड़ी तबियत, अस्पताल में भर्ती

जबलपुर| संदीप कुमार| पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया की रविवार रात अचानक ही तबियत बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया गया| जहाँ करीब 1 घंटे के इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनकी रिपार्ट को स्वस्थ बताया|.

निगम अपर आयुक्त के यहां विवाह समारोह में हुए थे शामिल
जानकारी के मुताबिक पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया नगर निगम अपर आयुक्त राकेश आयाची के हुए विवाह समारोह में शामिल हुए थे| इस वजह से उनके स्वास्थ्य में गिरावट हुई पर डॉक्टरों ने उनकी कोरोना टेस्ट भी की, इस टेस्ट में पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया की जो रिपोर्ट आई वह निगेटिव आई है। इस रिपोर्ट के बाद से कांग्रेस पदाधिकारी सहित उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।

कुछ घंटे की जांच के बाद होंगे डिस्चार्ज
पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया का जैसे ही स्वास्थ्य खराब हुआ वैसे ही उनके परिजन और कार्यकर्ताओं ने उन्हें इलाज के लिए रसल चौक स्थित निजी अस्पताल में भर्ती किया। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर कई तरह के चेकअप किए साथ ही पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया का कोरोना टेस्ट भी हुआ जो कि यह टेस्ट नेगेटिव निकला । जैसे ही परिजन और कार्यकर्ताओं को इस टेस्ट के निगेटिव निकलने की जानकारी मिली वैसे ही उन्होंने राहत की सांस ली। फिलहाल पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया का जो स्वास्थ्य है वह अभी पूरी तरह से ठीक है डॉक्टरों के मुताबिक कुछ ही घंटों में पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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