शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज जबलपुर में पदस्थ एक कर्मचारी ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती होकर लाखों रुपए का इलाज करवा लिया। शिकायत जब कलेक्टर राघवेंद्र सिंह तक पहुंची तो उन्होंने सीएमएचओ को जांच के निर्देश दिए, जहां पाया गया कि कर्मचारी बीते तीन साल से फर्जी कार्ड के जरिए शासन की योजना का लाभ लेकर शासन को चूना लगा रहा था। विभाग ने कर्मचारी सुनील कुमार जाट की जाँच रिपोर्ट कलेक्टर के पास भेज दी है।
जबलपुर निवासी सुमित कुमार ने 7 जुलाई 2026 को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने लिखित में शिकायत देते हुए बताया था कि शासकीय कला निकेतन पॉलिटेक्निक कॉलेज में पदस्थ यूडीसी (बाबू) सुनील कुमार जाट जो विवाहित है उसके दो बेटे और दो बेटी एवं पत्नी है। इसके बाद भी उन्होंने अपने आपको अविवाहित बताया। आरोप है कि सुनील कुमार ने दो समग्र आईडी बनवाई है। एक में पूरे परिवार का ब्यौरा है, जबकि दूसरी समग्र आईडी जिसमें पात्र व्यक्ति के साथ अपना नाम जोड़ते हुए अपने आपको अडॉप्टेड बताया।
फर्जी आयुष्मान कार्ड के जरिये शासन को चूना
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को समग्र आईडी और आयुष्मान योजना से जुड़े कुछ दस्तावेज भी सौंपे, जिसमें प्रथमदृष्टया पाया गया कि सुनील कुमार जाट ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासन की योजनाओं का लाभ लिया और निजी अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाया, जिससे शासन को लाखों रुपए की क्षति पहुंची है।
शिकायतकर्ता ने की एफआईआर की मांग
शिकायतकर्ता ने बताया कि अगर सुनील कुमार को इलाज करवाना था तो वह शासकीय कार्ड का भी उपयोग कर सकता था, इसके अलावा मेडीकल और जिला अस्पताल में भी इलाज होता है, पर उसने यह सब न करते हुए 2023 से शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे थे। मांग की गई है कि जब इस केस का खुलासा होगा और आरोपी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करवाई जाए।
जाँच में सही निकली शिकायत
सीएमएचओ डॉ नवीन कोठारी ने बताया कि कलेक्टर के पास से एक शिकायत पहुंची, जिसमें कहा गया है कि सुनील कुमार जो कि शासकीय कला निकेतन कालेज में बाबू के पद पर पदस्थ है, उन्होंने अपना फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाया और फिर निजी अस्पताल में डायलिसिस करवाया, ये एक गंभीर मामला है। जांच में आयुष्मान योजना विभाग में पदस्थ अधिकारियों ने शिकायत को सही पाया है। सीएमएचओ का कहना है कि रिपोर्ट कलेक्टर को भेज दी गई है। आगे वैधानिक कार्रवाई वही से होगी।







