सरकारी स्कूल को बना दिया अवैध शराब का ठिकाना, आबकारी विभाग ने मारा छापा

सरकारी स्कूल को बना दिया अवैध शराब का ठिकाना, आबकारी विभाग ने मारा छापा

जबलपुर, संदीप कुमार| अवैध शराब विक्रेताओं पर भले ही आबकारी विभाग लगातार कार्यवाही करता रहा हो पर आरोपी आबकारी विभाग से हमेशा एक कदम आगे ही रहते है। आबकारी विभाग ने आज सरकारी स्कूल में रखी अवैध शराब बरामद की है आरोपियो ने पुलिस और आबकारी विभाग से बचने के लिए बंन्द सरकारी स्कूल को शराब रखने की गोदाम बना रखी थी।

शासकीय प्राथमिक स्कूल मे रखी थी हजारो लीटर कच्ची शराब
मुखबिर की सूचना पर आबकारी विभाग की टीम ने जब घमापुर कुछ बलिया मोहल्ले में दबिश दी तो वहां पर शराब नहीं मिली पर थोड़ा और छानबीन करने के बाद जब आप कारी की टीम शासकीय प्राथमिक स्कूल के पास पहुंची तो वहां से कच्ची शराब की बदबू आ रही थी स्कूल के अंदर जब आबकारी विभाग की टीम बदबू आने के बाद पहुंची तो वहां पर भारी मात्रा में अवैध कच्ची शराब रखी हुई थी बताया जा रहा है कि शराब कारोबारियों ने शराब छुपाने के लिए सरकारी बंद स्कूल का इस्तेमाल किया था

सरकारी प्राथमिक स्कूल में रखी हुई थी पाँच हजार लीटर कच्ची शराब.….
आबकारी विभाग ने शासकीय प्रथमिक बालक स्कूल से 200 डिब्बे में रखी पांच हजार लीटर कच्ची शराब को जप्त किया हालांकि इस पूरी कार्यवाही के दौरान एक भी आरोपी टीम की गिरफ्त में नही आया।बताया जा रहा है कोरोना संक्रमण के चलते बंन्द हुए सरकारी स्कूल को शराब विक्रेताओं ने अवैध शराब रखने का अड्डा बना रखा हुआ था।

स्कूल के कर्मचारियों पर भी शक की सुई
जानकारी के मुताबिक अवैध शराब बनाने वाले लोग आबकारी और पुलिस से बचने के लिए बीते दो माह से सरकारी स्कूल का उपयोग कर रहे थे पर खास बात ये है कि इस पूरे मामले की स्कूल में पदस्थ कर्मचारी ओर वहाँ पदस्थ लोगों को जानकारी ही नही बहरहाल आबकारी टीम ने मौके से मिली शराब को नष्ट कर दिया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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