जबलपुर में डॉक्टर की पत्नी ने तीसरी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या, अक्सर होता था विवाद

जबलपुर में डॉक्टर की पत्नी ने तीसरी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या, अक्सर होता था विवाद

जबलपुर, संदीप कुमार| पति-पत्नी और वो के विवाद में आज फिर एक युवती ने आत्महत्या (Suicide) कर ली| मामला जबलपुर (Jabalpur) के अंकित अपार्टमेंट का है, जहाँ निजी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर की पत्नी आज अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल से कूद गई| घटना के बाद आनन फानन में युवती को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया जहाँ ईलाज के दौरान उनकी मौत हो गई|

पति के थे महिला से प्रेम संबंध-जानकरी लग गई थी पत्नी को
शहपुरा निवासी विक्रांत सिंह का कुछ साल पहले आरती सिंह के साथ बिवाह हुआ था, विक्रांत सिंह निजी अस्पताल में डॉक्टर थे और जबलपुर के अंकित अपार्टमेंट में किराए से रहा करते थे, जानकारी के मुताबिक विक्रांत सिंह का किसी युवती से प्रेम संबंध था जिसकी जानकारी आरती को लग गई थी, जिसके चलते आए दिन पति-पत्नी का विवाद भी होता था| शनिवार को भी आरती और विक्रांत का विवाद हुआ जिसके बाद देर रात आरती ने अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी| घायल हालत में आरती को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ आज दोपहर उसकी मौत हो गई|

परिजनों के डॉक्टर पर गंभीर आरोप
मृतक आरती के परिजनों का आरोप है कि विक्रांत के प्रेम संबंध को लेकर कई बार समझाया गया था पर वह नही माने, इतना ही नही विक्रांत सिंह को पुलिस में शिकायत करने की धमकी भी दी पर उसको फर्क नही पड़ा,और आखिरकार आज वही हुआ जिसका पहले से ही अंदेशा था|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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