छत्तीसगढ़ से निकलकर करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हाथियों का झुंड जबलपुर के बरगी इलाके तक पहुंच गया है। दरअसल बरगी के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी की खबर मिलते ही वन विभाग अलर्ट हो गया है। रविवार को 40 से ज्यादा कर्मचारी जंगल में हाथियों की तलाश में जुट गए। वन विभाग अब उनकी संख्या और मूवमेंट का पता लगा रहा है। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी घने जंगल की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
दरअसल बरगी में हाथियों का पहुंचना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जानकारों के मुताबिक इससे पहले इस इलाके के जंगलों में हाथियों को नहीं देखा गया था। अब तक उमरिया और शहडोल के जंगलों में हाथियों की आवाजाही की जानकारी सामने आती रही है। इस बार झुंड ने अपना रास्ता बदलते हुए बालाघाट के रास्ते जबलपुर की ओर सफर किया है। वन विभाग की टीम लगातार इलाके पर नजर रख रही है ताकि हाथियों की मौजूदगी से लोगों और फसलों को किसी तरह का नुकसान न हो।
छत्तीसगढ़ से बरगी तक कैसे पहुंचे हाथी?
जानकारी के मुताबिक हाथियों ने छत्तीसगढ़ से अपना सफर शुरू किया था। इसके बाद वे बालाघाट के चूरापूड़ी से होते हुए नकटिया और परासिया के रास्ते बरगी तक पहुंचे। इस दौरान झुंड ने करीब 300 किलोमीटर की दूरी तय की। हाथियों के इस तरह लंबा सफर तय करके नए इलाके में पहुंचने से वन विभाग की टीम उनकी मौजूदा लोकेशन और आगे की दिशा का पता लगाने में जुटी है। जबलपुर के डीएफओ पुनीत सोनकर के मुताबिक हाथियों के सफर की कोई तय सीमा नहीं होती। वे एक दिन में कितनी दूरी तय करेंगे यह उनकी चाल और हालात पर निर्भर करता है। कभी हाथी पूरा दिन चलते रहते हैं तो कभी 20 से 30 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। इसी वजह से उनकी आगे की मूवमेंट का अंदाजा लगाना आसान नहीं होता। वन विभाग के कर्मचारी जंगल में उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं ताकि झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है इसकी जानकारी समय पर मिल सके।
बरगी के जंगलों में क्यों रुके हाथी?
जानकारों के मुताबिक बरगी और आसपास के इलाके में फैली हरियाली, पानी और खाने की उपलब्धता हाथियों को यहां तक खींच लाई हो सकती है। सफर के दौरान हाथियों को जहां भोजन और पानी मिलता है वहां वे रुकते भी हैं। इसी वजह से उनकी चाल धीमी हो सकती है। बरगी के आसपास कुछ खेतों में हाथियों के घुसने की जानकारी भी सामने आई है हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्होंने ज्यादा नुकसान नहीं किया। हाथियों के नए इलाके में पहुंचने के बाद वन विभाग के सामने सबसे जरूरी काम उनकी सही संख्या और लोकेशन का पता लगाना है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि झुंड में कुल कितने हाथी हैं और वे आगे किस दिशा में बढ़ेंगे। टीम जंगल में उनकी मौजूदगी के संकेत तलाश रही है और हर गतिविधि पर नजर रख रही है। हाथियों के व्यवहार और रास्ते को समझकर ही विभाग आगे की निगरानी की योजना बना रहा है।
ग्रामीणों को जंगल से दूर रहने की सलाह
वहीं हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए जबलपुर वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। सिवनी वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई है ताकि आसपास के इलाकों में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। एक विशेष टीम दिन-रात जंगल में तैनात है और हाथियों की मूवमेंट पर नजर रख रही है। विभाग की कोशिश है कि झुंड को घने जंगल के भीतर ही रहने दिया जाए और वह आबादी वाले इलाकों की ओर न बढ़े। वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सावधानी बरतने और घने जंगल की ओर न जाने की सलाह दी है।
वंदना झां, जबलपुर






