जबलपुर: EOW की बड़ी कार्रवाई, बिजली मुख्यालय में दो वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा

जबलपुर के शक्ति भवन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की, जहां बिजली विभाग के दो वरिष्ठ इंजीनियरों को 10 लाख का बिल पास करने के एवज में रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा गया।
Jabalpur News

मध्य प्रदेश के बिजली मुख्यालय शक्ति भवन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में बिजली विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोचा गया। पकड़े गए अधिकारियों में अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले और कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा शामिल हैं। दोनों अधिकारी एक ठेकेदार से 10 लाख रुपए के बिल का भुगतान करने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे थे, जिसके बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने जाल बिछाकर उन्हें धर दबोचा।

जबलपुर स्थित शक्ति भवन में ईओडब्ल्यू की टीम ने यह कार्रवाई ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी की शिकायत पर की। शिकायतकर्ता अशोक कुमार द्विवेदी ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को बताया था कि कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील में जूनियर इंजीनियर कार्यालय भवन के निर्माण का कार्य उनके द्वारा किया गया था। इस निर्माण कार्य के एवज में उन्होंने 10 लाख रुपए का बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किया था। इस बिल को पास करने और भुगतान जारी करने के लिए बिजली विभाग के ये अधिकारी उनसे रिश्वत की मांग कर रहे थे।

रिश्वतखोरी की शिकायत का सत्यापन कर बिछाया गया जाल

शिकायतकर्ता ठेकेदार के मुताबिक, कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा ने बिल पास करने के लिए 20 हजार रुपए की घूस मांगी थी, जबकि अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले ने 30 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इन मांगों से परेशान होकर ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ का दरवाजा खटखटाया और पूरी जानकारी ईओडब्ल्यू को दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए ईओडब्ल्यू की टीम ने तुरंत सत्यापन किया और एक सुनियोजित तरीके से रिश्वतखोरों को पकड़ने का जाल बिछाया।

EOW की टीम ने अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

सोमवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने शक्ति भवन में गोपनीय तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। तय रणनीति के अनुसार, ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी रिश्वत की रकम लेकर संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचे। अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए ईओडब्ल्यू ने रंगे हाथ पकड़ा, वहीं कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए दबोचा गया। रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद दोनों अधिकारियों के होश उड़ गए और वे ईओडब्ल्यू टीम के सामने कोई जवाब नहीं दे पाए।

दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने पकड़े गए दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 (ए) के तहत अपराध दर्ज किया है। यह कार्रवाई बिजली विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बड़ी चोट मानी जा रही है। ईओडब्ल्यू की टीम ने दोनों आरोपित अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उनके कार्यालयों व आवासों पर भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि इस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और साक्ष्यों को जुटाया जा सके। विभाग के अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो इस रिश्वतखोरी में शामिल हो सकते हैं। इस कार्रवाई से सरकारी विभागों में ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों को बल मिलेगा और भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगेगी।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
Follow Us :GoogleNews