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हाईकोर्ट ने नर्सिंग भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर सरकार से जवाब मांगा, 15 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

Written by:Ankita Chourdia
Published:
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 800 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर पदों पर 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती मिली है। दरअसल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और कर्मचारी चयन मंडल से इस आधार पर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने नर्सिंग भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर सरकार से जवाब मांगा, 15 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के 800 से अधिक पदों पर लागू 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दरअसल हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और कर्मचारी चयन मंडल (ESB) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर किस आधार पर सभी पद केवल महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की गई है।

दरअसल यह विवाद कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 2 अप्रैल 2026 को जारी ‘नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026’ के विज्ञापन के बाद सामने आया। इस विज्ञापन में नर्सिंग ऑफिसर के सभी पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिए गए थे। इसके कारण राज्य के कई योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित हो गए। उनका कहना है कि यह फैसला भेदभावपूर्ण है और उनके अधिकारों के खिलाफ है।

जानिए याचिका में क्या कहा गया?

वहीं पुरुष अभ्यर्थियों की ओर से संतोष कुमार लोधी सहित कई याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनके वकील विशाल बघेल ने कोर्ट में बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर की भर्ती ‘मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023’ के तहत होती है। इन नियमों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि यह पद केवल महिलाओं के लिए होगा। नियमों के अनुसार पुरुष और महिला दोनों ही उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, यदि वे तय योग्यता पूरी करते हों।

नियमों में लिंग के आधार पर कोई रोक नहीं

दरअसल याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब भर्ती नियमों में लिंग के आधार पर कोई रोक नहीं है, तो विज्ञापन में सभी पद केवल महिलाओं के लिए आरक्षित करना नियमों का उल्लंघन है। उनके अनुसार यह फैसला मनमाना है और इससे योग्य पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी के अवसर से वंचित किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि नर्सिंग के क्षेत्र में पुरुष और महिला दोनों समान रूप से काम करते हैं। दोनों एक जैसे कोर्स पढ़ते हैं, समान प्रशिक्षण लेते हैं और नर्सिंग काउंसिल से पंजीकरण भी समान तरीके से होता है। ऐसे में केवल लिंग के आधार पर पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर करना उचित नहीं माना जा सकता।

बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के खिलाफ भी बताया है। उनका कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करता है। ऐसे में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण इन सिद्धांतों के विपरीत है। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भर्ती विज्ञापन के उस हिस्से को रद्द किया जाए जिसमें नर्सिंग ऑफिसर के सभी पद केवल महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। उनका कहना है कि पुरुष उम्मीदवारों को भी आवेदन करने और प्रतियोगिता में भाग लेने का समान अवसर मिलना चाहिए।

जस्टिस विशाल घगट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और कर्मचारी चयन मंडल से इस पर विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि यह निर्णय किस नीति या नियम के आधार पर लिया गया है।

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