दरअसल पुणे में शिवसेना की पूरी कार्यकारिणी भंग करने का फैसला संगठन की समीक्षा के बाद लिया गया है। एकनाथ शिंदे ने हाल ही में एक ऑनलाइन बैठक में साफ कहा था कि “काम नहीं तो पद भी नहीं।” पुणे में की गई यह कार्रवाई उनकी उसी चेतावनी का पहला बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि आने वाले समय में पार्टी संगठन में और बदलाव किए जा सकते हैं।
सभी को जमीनी स्तर पर काम करना होगा: शिंदे
बैठक के दौरान शिंदे ने कहा कि पार्टी में सभी को जमीनी स्तर पर काम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई कैबिनेट मंत्री हो, विधायक हो या सांसद, सभी को आम कार्यकर्ताओं की तरह ही क्षेत्र में सक्रिय रहना होगा। उनका कहना है कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए हर कार्यकर्ता को मैदान में उतरकर काम करना जरूरी है।
समीक्षा बैठक में एकनाथ शिंदे ने संपर्क प्रमुखों से सीधे सवाल किए और उनके काम का हिसाब मांगा। उन्होंने पूछा कि अब तक कितने बीएलए यानी बूथ स्तर के एजेंट नियुक्त किए गए हैं, कितनी बार क्षेत्र का दौरा किया गया है और कितनी जनसंपर्क बैठकें हुई हैं। जिन पदाधिकारियों का काम संतोषजनक नहीं पाया गया, उनके खिलाफ कार्रवाई का संकेत भी दिया गया है।
नियमित रूप से अपने काम की रिपोर्ट देने के निर्देश
पार्टी पदाधिकारियों को अब नियमित रूप से अपने काम की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें बैठकों की जानकारी और फोटो भी जमा करनी होंगी। शिंदे ने साफ कहा है कि जो पदाधिकारी निष्क्रिय रहेंगे या काम की सही जानकारी नहीं देंगे, उन्हें पद से हटाया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य संगठन में जवाबदेही और सक्रियता बढ़ाना बताया जा रहा है।
आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए शिंदे ने मतदाता सूची पर भी गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि हर मतदाता सूची पर कम से कम दो बीएलए नियुक्त किए जाएं और उनसे नियमित संपर्क रखा जाए। फिलहाल कोई बड़ा चुनाव नजदीक नहीं है, इसलिए पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
शिंदे का लक्ष्य है कि महाराष्ट्र के करीब 43 हजार गांवों तक पार्टी की मजबूत मौजूदगी हो और हर गांव में संगठन सक्रिय दिखाई दे। इसके लिए पदाधिकारियों को लगातार क्षेत्र में काम करने और लोगों से जुड़ने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार एकनाथ शिंदे आगे भी संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव कर सकते हैं। उनका साफ संदेश है कि पार्टी में वही लोग पद पर बने रहेंगे जो सक्रिय रूप से काम करेंगे।






