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हाईकोर्ट में बीना विधायक निर्मला सप्रे का यू-टर्न, दलबदल केस में नया मोड़, कहा, ‘मैं अब भी कांग्रेस सदस्य हूं’, उमंग सिंघार ने विधायकी रद्द करने की मांग की

Written by:Ankita Chourdia
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बीना से कांग्रेस विधायक रहीं निर्मला सप्रे ने हाईकोर्ट में दावा किया कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं। दरअसल यह बयान उनके सार्वजनिक रूप से भाजपा में शामिल होने के दावों के ठीक उलट है। वहीं दलबदल मामले में एक बड़ा मोड़ ले आया है।
हाईकोर्ट में बीना विधायक निर्मला सप्रे का यू-टर्न, दलबदल केस में नया मोड़, कहा, ‘मैं अब भी कांग्रेस सदस्य हूं’, उमंग सिंघार ने विधायकी रद्द करने की मांग की

जबलपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल बीना विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में अब एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। बता दें कि हाईकोर्ट में सप्रे के वकील ने दावा किया है कि उनकी मुवक्किल अभी भी कांग्रेस की सदस्य हैं। दरअसल यह बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सार्वजनिक मंच से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उनके इस दावे ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है और अब यह मामला सबूतों की लड़ाई में तब्दील हो गया है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सप्रे की विधायकी रद्द करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने सिंघार को 9 अप्रैल तक विधानसभा स्पीकर के सामने दलबदल के पुख्ता सबूत पेश करने का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को हाईकोर्ट में तय की गई है।

पूरा मामला क्या है?

दरअसल बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उनकी भाजपा में शामिल होने की तस्वीरें और खबरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी पोस्ट शामिल थे।

वहीं इसके बाद, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष दल-बदल कानून के तहत निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की याचिका दायर की। सिंघार का आरोप था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत, यदि कोई विधायक अपनी पार्टी छोड़ता है तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि, स्पीकर के समक्ष इस मामले में लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट में आया बड़ा यू-टर्न

दरअसल जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में 31 मार्च को इस मामले पर सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान ही एक बड़ा यू-टर्न देखने को मिला। निर्मला सप्रे की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जब सप्रे कांग्रेस की सदस्य हैं ही, तो उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता। इस दलील ने अब तक चल रही पूरी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।

वहीं राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को जानकारी दी कि इस मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष भी जारी है। उन्होंने बताया कि सप्रे के बयान स्पीकर के सामने दर्ज किए जा चुके हैं, जिसमें उन्होंने खुद को कांग्रेस का सदस्य बताया है। महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा समय-समय पर उनके समर्थन में व्हिप जारी किए गए हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि इस मामले में उमंग सिंघार ने स्पीकर के समक्ष अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने के लिए समय मांगा है, और 9 अप्रैल को स्पीकर अगली सुनवाई करेंगे।

सीएम के एक्स अकाउंट पर पोस्ट हुई थी तस्वीरें, कोर्ट ने नहीं माना पुख्ता आधार

दरअसल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने के पुख्ता सबूत सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। खंडेलवाल ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से भी इसकी जानकारी साझा की गई थी। उनके अनुसार, कई तस्वीरें और पोस्ट आज भी ऑनलाइन मौजूद हैं, जो सप्रे के भाजपा जॉइन करने की पुष्टि करते हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट को निर्णायक साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया। बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा किए गए पोस्ट के आधार पर सीधे तौर पर संबंधित व्यक्ति की स्थिति तय नहीं की जा सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया कि उमंग सिंघार की ओर से ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य स्पीकर के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं, जिससे यह साबित हो सके कि निर्मला सप्रे ने वास्तव में दल-बदल किया है।

अब सबूतों की लड़ाई, स्पीकर के पास अहम सुनवाई

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 अप्रैल को स्पीकर के समक्ष होने वाली सुनवाई में उमंग सिंघार को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की है, ताकि स्पीकर को भी अपनी कार्यवाही के लिए पर्याप्त समय मिल सके। अब इस केस में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिंघार के वकील निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने के पुख्ता और कानूनी रूप से मान्य सबूत सामने ला पाएंगे।

Ankita Chourdia
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