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बसपा सुप्रीमो मायावती की कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण मांग, केंद्र से तत्काल ध्यान देने का किया अनुरोध

Written by:Gaurav Sharma
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने कमजोर वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की मांग उठाई है। उन्होंने मंगलवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में कहा कि ऐसा न होने से इन वर्गों का अपेक्षित विकास संभव नहीं है। मायावती ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने का अनुरोध किया है, साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी निष्ठा से चुनाव तैयारियों में जुटने का निर्देश दिया।
बसपा सुप्रीमो मायावती की कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण मांग, केंद्र से तत्काल ध्यान देने का किया अनुरोध

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठाई है। उन्होंने यह बात मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में कही। मायावती का तर्क है कि मौजूदा सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में अगर इन कमजोर वर्गों की महिलाओं को विशिष्ट और अलग से आरक्षण नहीं दिया जाता है, तो उनका अपेक्षित विकास और सशक्तिकरण कितना संभव हो पाएगा, यह वास्तव में सोचने वाली बात है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने का अनुरोध किया है। बसपा प्रमुख का मानना है कि केवल सामान्य आरक्षण से इन वर्गों की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता, जिससे वे विकास की मुख्यधारा से वंचित रह जाती हैं। उनकी इस मांग को बसपा की उस व्यापक सामाजिक न्याय की अवधारणा से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत पार्टी समाज के हर वंचित तबके के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध होने का दावा करती है। इस कदम से वे इन महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में बेहतर अवसर दिलाना चाहती हैं।

मायावती ने चुनावी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की

मंगलवार को लखनऊ में हुई इस समीक्षा बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिनमें राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल प्रमुख थे। मायावती ने बैठक के दौरान सभी राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारियों से आगामी चुनावों की तैयारियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट ली। उन्होंने एक-एक रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा की और जहां-जहां कमी दिखी, वहां तैयारियों को और बेहतर बनाने के लिए ठोस निर्देश दिए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप देना, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना था। मायावती ने सभी पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल कागजी कार्रवाई पर ध्यान न दें, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर जनता से सीधा संवाद स्थापित करें और उनकी समस्याओं को समझें।

मायावती ने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश और खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में करोड़ों लोग सरकारी उदासीनता, खोखले वादों और जुमलेबाजी से त्रस्त हो चुके हैं। इन लोगों की उम्मीद भरी नजरें अब बसपा की ओर हैं, क्योंकि वे बसपा को एक विश्वसनीय विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यापक भरोसे और उम्मीद पर खरा उतरने के लिए पार्टी के हर कार्यकर्ता को पूरी निष्ठा, लगन और अदम्य मेहनत से काम करना होगा। मायावती ने उत्तर प्रदेश की बदहाल स्थिति पर विशेष चिंता जताई, जहां बेरोजगारी और गरीबी के कारण रोटी-रोजी की समस्या लगातार विकट होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल हवाई बातों और बड़े-बड़े दावों से लोगों की भूख, प्यास, गरीबी और बेरोजगारी मिटाना चाहती है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर और बेहद दुखद है। उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जनता के बीच जाकर सरकार की विफलताओं को उजागर करें और बसपा के जनहितैषी एजेंडे को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।

मायावती ने वैश्विक हालात और आर्थिक चुनौतियों पर जताई चिंता

बसपा सुप्रीमो ने देश के सामने खड़ी वर्तमान आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के प्रभावों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के विरुद्ध युद्ध की आशंका से वैश्विक बाजार में भूचाल आया हुआ है। इसका सीधा असर रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे भारत में वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बढ़ती महंगाई ने गरीब और मेहनतकश समाज के लिए ‘गरीबी में आटा और गीला’ वाली कहावत को सच कर दिया है, क्योंकि उनकी सीमित आय में गुजारा करना और भी मुश्किल हो गया है। मायावती ने केंद्र सरकार से इस गंभीर आर्थिक संकट और अनियंत्रित महंगाई के समाधान के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने यह भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि देश को भविष्य में नोटबंदी और कोरोना महामारी जैसी अचानक आने वाली बड़ी विपत्तियों से फिर न झेलना पड़े, इसके लिए सरकार को विपक्ष को भी विश्वास में लेकर एक दीर्घकालीन और ठोस आर्थिक नीति पर काम करना चाहिए, जो केवल तात्कालिक राहत से आगे बढ़कर स्थायी समाधान दे सके।

14 अप्रैल को लखनऊ में मुख्य समारोह

पार्टी कार्यक्रमों के तहत, मायावती ने आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती को पूरी ‘मिशनरी भावना’ और उत्साह के साथ मनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मुख्य जयंती समारोह राजधानी लखनऊ में आयोजित होगा। उन्होंने पार्टी के सभी 18 मंडलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपने परिवार सहित अंबेडकर स्मारक में आकर इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। बसपा प्रमुख ने बताया कि आमतौर पर यह मुख्य कार्यक्रम नोएडा में स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर आयोजित होता रहा है, लेकिन इन दिनों वहां मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसी वजह से इस बार मुख्य जयंती समारोह राजधानी लखनऊ में ही आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह कार्यक्रम बाबा साहेब के सामाजिक न्याय, समानता और सशक्तिकरण के आदर्शों और उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण मंच होगा, जिससे पार्टी अपने मूल सिद्धांतों को फिर से रेखांकित कर सके।

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को दिए कड़े और स्पष्ट निर्देश

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को बेहद कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बसपा में आपराधिक तत्वों को दूसरी पार्टियों की तरह कतई प्रश्रय नहीं दिया जाएगा। पार्टी की छवि हमेशा साफ-सुथरी और सिद्धांतों पर आधारित रही है। मायावती ने दोहराया कि बसपा अपनी कथनी और करनी में ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की विशिष्ट पहचान रखती है। इसलिए प्रत्याशियों को शॉर्टलिस्ट करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि समाज के सभी वर्गों, यानी सर्वसमाज को उचित और समुचित प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को पार्टी का टिकट न मिले और बसपा की नैतिक एवं राजनीतिक विश्वसनीयता बरकरार रहे। यह कदम पार्टी की ईमानदारी और पारदर्शिता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता को मजबूत करेगा।

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