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IAS रिंकू सिंह राही ने अपने पद से दिया इस्तीफा, यूपी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- न कोई पोस्टिंग दी जा रही और न ही कार्य

Written by:Ankita Chourdia
Published:
यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्य सरकार पर पोस्टिंग न देने और कोई कार्य आवंटित न करने का आरोप लगाया है। राही शाहजहांपुर में एसडीएम रहते वकीलों के सामने उठक-बैठक करने को लेकर चर्चा में आए थे, जिसके बाद उन्हें राजस्व परिषद से अटैच कर साइडलाइन कर दिया गया था।
IAS रिंकू सिंह राही ने अपने पद से दिया इस्तीफा, यूपी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- न कोई पोस्टिंग दी जा रही और न ही कार्य

उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राही ने कहा कि उन्हें कोई पोस्टिंग नहीं दी जा रही है और न ही कोई कार्य आवंटित किया गया है। यह आरोप उन्होंने अपने इस्तीफे वाले पत्र में साफ तौर पर लिखे हैं।

रिंकू सिंह राही 2022 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वह शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनात थे। इसी दौरान वह वकीलों के सामने उठक-बैठक करने के मामले में चर्चा में आए थे। यह घटना सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने उन्हें राजस्व परिषद से अटैच कर दिया था। राही का आरोप है कि शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद उन्हें जानबूझकर साइडलाइन किया गया। उन्हें लगातार पोस्टिंग से वंचित रखा गया, जिसके चलते उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है।

सुर्खियों में रहा रिंकू सिंह राही का करियर

रिंकू सिंह राही का करियर हमेशा सुर्खियों में रहा है, आईएएस बनने से पहले भी। आईएएस बनने से पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपी पीसीएस) की परीक्षा पास की थी। इसके बाद वह समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात हुए थे। उनका शुरुआती करियर भी चुनौतियों भरा रहा है।

वर्ष 2009 में, जब रिंकू सिंह राही मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था। यह घोटाला काफी बड़ा था और इसके उजागर होने के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उन्हें सात गोलियां लगी थीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, रिंकू सिंह राही इस हमले से बच गए थे। इस हमले के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लड़ाई जारी रखी। उन्होंने ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम करना कभी नहीं छोड़ा।

संघर्षों के बीच जारी रखी UPSC की तैयारी, बने IAS अधिकारी

इस बीच, अपनी नौकरी और पुरानी घटनाओं से जूझते हुए भी रिंकू सिंह राही ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी जारी रखी। उनकी कड़ी मेहनत और लगन रंग लाई। वर्ष 2022 में उन्हें बड़ी सफलता मिली और उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के लिए हो गया। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, खासकर उस पृष्ठभूमि को देखते हुए जिससे वह आए थे।

संयोग से, उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर ही आवंटित हुआ। यह उनके गृह राज्य में सेवा करने का अवसर था। आईएएस ट्रेनिंग के तहत उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें फील्ड ट्रेनिंग के लिए अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश भेजा गया। यहीं उन्हें शाहजहांपुर जिले की तिलहर तहसील का एसडीएम बनाया गया।

वकीलों का धरना-प्रदर्शन, लगाई थी उठक-बैठक

तिलहर में उनकी तैनाती के साथ ही एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें एक बार फिर चर्चा में ला दिया। बताया जाता है कि जिस दिन वह तिलहर तहसील में कार्यभार ग्रहण करने जा रहे थे, उसी समय तहसील परिसर में वकीलों का एक धरना-प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शन कर रहे वकीलों को देखकर रिंकू सिंह राही उनसे मिलने चले गए।

इसी मुलाकात के दौरान एक अप्रत्याशित वाक्या हुआ। रिंकू सिंह राही ने वकीलों के सामने उठक-बैठक लगा दी। यह दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए। इस घटना का वीडियो तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसने खूब सुर्खियां बटोरीं। इस घटना ने प्रशासन और जनता दोनों का ध्यान खींचा।

इस घटना के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। आईएएस रिंकू सिंह राही को राजस्व परिषद, लखनऊ से अटैच कर दिया गया। तब से लेकर अब तक उन्हें कोई नई पोस्टिंग नहीं मिली थी। राजस्व परिषद में अटैच होने के बाद से वह लगातार बिना किसी सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी के काम कर रहे थे।

रिंकू सिंह राही ने बताई इस्तीफे की वजह

इसी स्थिति से खफा होकर और लगातार साइडलाइन किए जाने से परेशान होकर रिंकू सिंह राही ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे वाले पत्र में उनका दर्द साफ झलक रहा था, जहां उन्होंने पोस्टिंग न मिलने और कार्य आवंटन न होने की बात कही है। इस इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में तेज चर्चा छेड़ दी है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार उनके इस इस्तीफे पर क्या फैसला लेती है। क्या उनके आरोप सही पाए जाएंगे, या सरकार इस पर कोई और कदम उठाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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