जबलपुर के मास्टर प्लान पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को दिए दो माह में फैसला लेने के निर्देश

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि मामला विचाराधीन है और जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। हालांकि न्यायालय ने इस देरी पर नाराजगी जताई।
MP High Court

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जबलपुर शहर के मास्टर प्लान को लेकर एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें शहर के विकास से जुड़ा बड़ा मुद्दा उठाया गया। यह याचिका क्रेडाई जबलपुर बिल्डर एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है। याचिका में मुख्य रूप से इस बात पर चिंता जताई गई कि जबलपुर का मास्टर प्लान वर्ष 2021 में समाप्त हो चुका है, लेकिन 2026 तक भी नया मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मास्टर प्लान के अभाव में शहर का व्यवस्थित विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। खासतौर पर वर्ष 2014 में नगर निगम सीमा में शामिल किए गए करीब डेढ़ सौ गांवों के लिए अब तक कोई स्पष्ट योजना लागू नहीं हो सकी है। इसके चलते नए निर्माण कार्यों और प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है, जिससे बिल्डर्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, नियमों के अभाव में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे शासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।

जबलपुर बिल्डर एसोसिएशन ने दायर की है याचिका 

बिल्डर एसोसिएशन ने यह भी बताया कि वे लंबे समय से नए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने कई बार शिकायतें और आवेदन दिए। जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त की गई। इस जानकारी में सामने आया कि 31 जनवरी 2026 को संबंधित विभाग के डायरेक्टर द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 18 के तहत मास्टर प्लान को प्रकाशन के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक उसका प्रकाशन नहीं किया गया है।

शासन के जवाब से हाई कोर्ट नाराज 

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि मामला विचाराधीन है और जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। हालांकि न्यायालय ने इस देरी पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब मास्टर प्लान प्रकाशन के लिए भेजा जा चुका है और आपत्तियां आमंत्रित की जानी हैं, तो इसमें अनावश्यक विलंब क्यों किया जा रहा है।

राज्य सरकार को 8 सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश 

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए और उन्हें इसकी सूचना भी दी जाए। साथ ही अंतिम निर्णय लेकर मास्टर प्लान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि समय पर मास्टर प्लान लागू न होने से शहर के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और इसे जल्द लागू किया जाना जरूरी है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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