सोशल पुलिसिंग में उतरी जबलपुर पुलिस, गरीब और निसहाय लोगों को खिलाएंगी खाना

सोशल पुलिसिंग में उतरी जबलपुर पुलिस, गरीब और निसहाय लोगों को खिलाएंगी खाना

जबलपुर। संदीप कुमार. कोरोना वायरस के चलते पूरे जबलपुर जिले में लॉक डाउन किया गया है ऐसे में सन्नाटा आगामी 26 मांर्च तक पूरे जिले में देखने को मिलेगा।इस दौरान वो लोग जो कि नर्मदा तट या बस स्टैंड में मांग कर खाना खाया करते थे उनको सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।ऐसे में जबलपुर की सॉफ्ट पोलिसिंग सामने आई है। जबलपुर पुलिस ने तय किया है कि समाजसेवियों के साथ मिलकर वो भी गरीब और असहाय लोगों को खाना मुहैया कराएंगे।

एसपी अमित सिंह की है सोशल पुलिसिंग
जबलपुर एसपी अमित सिंह की माने तो बीते 56 घंटे से लॉक डाउन पूरा शहर है जिसके चलते वह लोग जो कि बीमार है गरीब है, अन साउंड है वो अपने एक दायरे में रहते है उन्हें खाना नही मिल पा रहा है।कुछ नर्मदा तट में भिक्षा मांगकर तो कुछ भंडारे की दम पर जीवन यापन करते थे उन्हें भोजन नही मिल रहा है उनके लिए अब जबलपुर पुलिस खाना खाने की मदद करेगी।

गरीबो की मदद के लिए पुलिस ने समाजिक संगठन से की मदद की अपील
एसपी ने सामाजिक संगठन से मिलकर गरीबो के लिए तब तक खाने की व्यवस्था करने की ठानी है जब तक लॉक डाउन रहता है।जबलपुर पुलिस की इस सोशल पोलिसिंग की अब लोग भी सराहना कर रहे है।गौरतलब है कोरोना वायरस के चलते जबलपुर में बीते 56 घंटे से लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews