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रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु राजेश वर्मा को NSUI ने घेरा, अवैध नियुक्ति और परीक्षा न होने पर इस्तीफे की मांग

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Gaurav Sharma
Published:
जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा को करीब आधे घंटे तक उनके कार्यालय में बंधक बनाए रखा और उनकी नियुक्ति को अवैध बताते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु राजेश वर्मा को NSUI ने घेरा, अवैध नियुक्ति और परीक्षा न होने पर इस्तीफे की मांग

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का घेराव कर दिया। छात्रों का गुस्सा इस कदर बढ़ा कि उन्होंने कुलगुरु को करीब आधे घंटे तक उनके ही कार्यालय में एक तरह से बंधक बना लिया।

घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब एनएसयूआई कार्यकर्ता विश्वविद्यालय में परीक्षाएं न होने और परिणामों में देरी को लेकर कुलगुरु से बात करने पहुंचे। उन्होंने प्रोफेसर वर्मा की गाड़ी को रोका, लेकिन कुलगुरु गाड़ी से उतरकर पैदल ही जाने लगे। कुछ दूर जाने के बाद जब वे वापस अपने कार्यालय की ओर लौटे, तो नाराज कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे।

‘कुलगुरु नहीं, सीए की भूमिका निभा रहे’

एनएसयूआई ने कुलगुरु पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि प्रोफेसर राजेश वर्मा की नियुक्ति पूरी तरह से अवैध है और उन्हें तुरंत पद छोड़ देना चाहिए। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सचिन रजक ने कहा, “विश्वविद्यालय का शैक्षणिक स्तर लगातार गिर रहा है। कुलगुरु पढ़ाई और परीक्षा पर ध्यान देने के बजाय सरकार का पैसा बचाने में लगे हैं, वे यहां एक सीए की भूमिका निभा रहे हैं।”

छात्र नेताओं का आरोप है कि समय पर परीक्षाएं नहीं हो रहीं, रिजल्ट घोषित नहीं हो रहे और डिग्रियां भी नहीं मिल रही हैं, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

ज्ञापन देने की कोशिश में बढ़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम पर एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित मिश्रा ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वे शांतिपूर्वक कुलगुरु को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं की बात सुनने से इनकार कर दिया।

“हम लगातार उनसे निवेदन कर रहे थे कि उन्हें ज्ञापन देना है, लेकिन उन्होंने हमारी बातों को नजरअंदाज कर दिया और जाने लगे। इससे कार्यकर्ता नाराज हो गए और उन्हें कार्यालय में ही रोकना पड़ा।”- अमित मिश्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष, NSUI

संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रोफेसर राजेश वर्मा अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, उनका विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा। इस घेराव के बाद विश्वविद्यालय परिसर में माहौल गरमा गया है।

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Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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