विपक्ष के हंगामे के बीच नगर निगम के वार्डों का हुआ आरक्षण, ओबीसी-20 वार्ड, सामान्य-44 वार्ड आरक्षित

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जबलपुर, संदीप कुमार| नगरीय निकाय चुनाव (Urban Body Election) के मद्देनजर वार्डो के आरक्षण की प्रक्रिया (Reservation process) आज संपन्न हुई| मानस भवन प्रेक्षागृह में आयोजित हुए एक समारोह में एक-एक कर अलग-अलग वर्ग के लिए आरक्षण शुरू किया गया। सबसे पहले ओबीसी (OBC) वर्ग और उसके बाद सामान्य (General) वर्ग और फिर एसटी एससी (ST-SC) वर्ग के लिए शहर के 79 वार्डों के लिए आरक्षण संपन्न किया गया ।

प्रक्रिया के दौरान महिला वर्ग को आरक्षण में रूलिंग का पालन ना करने को लेकर बीच में हंगामे की स्थिति भी निर्मित हुई| विपक्षी याने कांग्रेस पार्षदों ने रूलिंग का पालन ना करने के आरोप लगाते हुए आरक्षण की प्रक्रिया को रुकवाया और भारी हंगामा भी देखने को मिला। अधिकारियों की समझाइश के बाद हंगामा शांत हुआ और फिर आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई ।

जबलपुर नगर निगम की 79 वार्डो की आरक्षण प्रक्रिया खत्म होने के बाद यह है स्थिति

जबलपुर शहर के 79 वार्ड कुछ इस तरह से हुए आरक्षित

OBC वर्ग के लिए 20 वार्ड हुए आरक्षित
OBC महिला – 10 वॉर्ड
36,71,10,24,17,57,1,67,20,27

OBC अनारक्षित – 10 वार्ड
59,37,2,3,38,74,65,5,54,28

सामान्य वर्ग के लिए 44 वार्ड हुए आरक्षित
सामान्य वार्ड महिला
4,6,7,12,15,22,25,31,41,68,79,14,19,33,69,13,21,72,76,30,50,60

सामान्य वार्ड अनारक्षित
8,11,16,32,34,35,39,40,42,51,55,56,73,49,18,43,46,61,23,45,47,26

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुए 11 वार्ड
SC अनारक्षित 44,52,78,63,62
SC महिला 53,58,66,48,29,9

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हुए 4 वार्ड
ST महिला 75,70
ST अनारक्षित-64,77

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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