सोम डिस्टलरी लाइसेंस निलंबन मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई, जस्टिस विवेक अग्रवाल ने नोटिस जारी किया

जबलपुर में सोम डिस्टलरीज से जुड़े लाइसेंस निलंबन विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य अधिकारियों से जवाब मांगा है। जस्टिस विवेक अग्रवाल ने वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव और आबकारी आयुक्त को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता कंपनियों का कहना है कि 4 फरवरी 2026 का निलंबन आदेश बिना सुनवाई के पारित किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
सोम डिस्टलरी लाइसेंस निलंबन मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई, जस्टिस विवेक अग्रवाल ने नोटिस जारी किया

सोम डिस्टलरी समूह की दो कंपनियों के लाइसेंस निलंबन विवाद में गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने अहम प्रक्रिया शुरू कर दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव और आबकारी आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिका सोम डिस्टलरीज प्रा. लि. और सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज प्रा. लि. की ओर से दायर की गई है। इसमें 4 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आबकारी आयुक्त ने दोनों कंपनियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। कंपनियों का मुख्य तर्क यह है कि आदेश पारित करने से पहले उन्हें न तो पर्याप्त नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

याचिका का केंद्र: प्राकृतिक न्याय और अधिकार क्षेत्र

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने कहा कि लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई से पहले सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। उनके अनुसार बिना सुनवाई की गई प्रशासनिक कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिका में यह भी कहा गया कि नोटिस और सुनवाई के बिना पारित आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैधानिक माना जाना चाहिए।

इस मुद्दे को लेकर अदालत में जोर इस बात पर रहा कि क्या विभागीय प्रक्रिया में न्यूनतम वैधानिक और न्यायसंगत मानकों का पालन हुआ या नहीं। फिलहाल कोर्ट ने प्रतिवादी अधिकारियों से जवाब मांगकर मामले को अगली सुनवाई के लिए खुला रखा है।

मामले का पूर्व घटनाक्रम: कई बेंचों से गुजरने के बाद सुनवाई

इस विवाद की सुनवाई का क्रम भी असामान्य रहा है। 6 फरवरी की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने पक्ष रखा था। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और अधिवक्ता आदित्य पाराशर उपस्थित हुए थे। उस चरण में दलीलें सुनने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

इसके बाद 24 फरवरी को जस्टिस मिश्रा के मामले से अलग होने की स्थिति बनी। फिर 25 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने प्रशासनिक आदेश के जरिए याचिका को जस्टिस एसएन भट्ट की अदालत में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। मामला बीते शुक्रवार को जस्टिस भट्ट की बेंच के समक्ष लगा, लेकिन उन्होंने भी सुनवाई से इंकार कर दिया।

दो न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई न किए जाने के बाद यह याचिका अंततः जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष आई, जहां गुरुवार को पहली प्रभावी सुनवाई हुई और नोटिस जारी किए गए।

अब आगे क्या

अदालत ने इस चरण में किसी अंतिम राहत पर फैसला नहीं दिया है, लेकिन राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और आबकारी अधिकारियों से जवाब मांगना मामले को निर्णायक चरण की ओर ले जाता है। अब अगली कार्यवाही में यह स्पष्ट होगा कि 4 फरवरी 2026 का निलंबन आदेश किस प्रक्रिया के तहत पारित हुआ और क्या याचिकाकर्ताओं को नियमानुसार सुनवाई का अवसर दिया गया था।

चीफ जस्टिस के प्रशासनिक आदेश के बाद मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच में नियत है, इसलिए आगे की सुनवाई भी इसी बेंच में होने की संभावना है।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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