नेताजी बोस का जबलपुर से था गहरा नाता, उनके और स्मारक बनना चाहिए : लखन घनघोरिया

नेताजी बोस का जबलपुर से था गहरा नाता, उनके और स्मारक बनना चाहिए : लखन घनघोरिया

जबलपुर|
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम पर जबलपुर में केंद्रीय जेल,मेडिकल कॉलेज जरूर है पर जिस तरह से उन्होंने देश के लिए अपनी आहूति दी जेल में बंद रहे उसे देखते हुए ये नाकाफी है,ये कहना है कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया का।जबलपुर में आज मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में पूरा देश उनको मानता है पर जितना भी जबलपुर में उनके नाम पर है वो नाकाफी है।जो जुड़ाव उनका जबलपुर से रहा है उसके देखते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम पर अच्छा स्मारक होना चाहिए इससे मैं सहमत हूँ।वही सागर निवासी दलित युवक धन प्रशाद की इलाज के दौरान हुई मौत पर सियासी बयानबाजी भी होने लगी है।नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बयान पर केबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया ने तंज कसा है उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष हमेशा आधारहीन बाते करते है और ये उनकी आदत में शुमार हो गया है।वही उन्होंने कहा कि सागर घटना से मध्यप्रदेश सरकार भी आहत है ऐसे में जो भी दोषी जांच में पाया जाएगा उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी।गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने धन प्रशाद की मौत को लेकर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए मृतक परिवार को आर्थिक मदद और नोकरी की मांग की है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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