LOCKDOWN4: विष्णु रसोई के जरिये शहर के युवा कर रहे लोगों की मदद

LOCKDOWN4: विष्णु रसोई के जरिये शहर के युवा कर रहे लोगों की मदद

जबलपुर।संदीप कुमार

कोरोना वायरस का चौथा लॉक डाउन भी शुरू हो गया पर देश के हालात जस के तस है।कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो मजदूरों के हालात भी पहले जैसे ही है।हा ये जरूर है कि चौथे लॉक डाउन में मजदूरों की सेवा करने वाले समाजसेवियों की संख्या अब न के बराबर हो गई है।नगर निगम ने भी बजट के आभाव में गरीबो को बाटा जाने वाला भोजन देना बंद कर दिया है।ऐसे हालात में पर जबलपुर के युवाओं की विष्णु रसोई अभी भी निरंतर चल रही है।रांझी में रहने वाले कुछ युवा चौथे लॉक डाउन में भी गरीबो को भोजन बॉटने का जारी रखा हुआ है।बीते 22 मांर्च से शहर के युवा रोजाना अपनी हैसियत के अनुसार गरीबो के लिए खाना बनाकर बस्ती बस्ती बाट रहे है।

सभी युवा करते है कलेक्शन,फिर स्वयं ही बनाते है खाना

जबलपुर शहर में जब से लॉक डाउन लगा हुआ है तब से ये युवा गरीबो के लिए खाने की व्यवस्था कर रहे है।पहले ये सब मिलकर रु का कलेक्शन करते है और फिर उन्ही रु से दाल-चावल-सब्जी खरीद कर लाते है।कभी खिचड़ी तो कभी दाल-चावल तो कभी पुलाव बनाकर ये लोग अभी भी गरीबो की मदद करने में जुटे हुए है।

समय बीतता जा रहा है पर हौसले नही टूटे

बीते 22 मांर्च से शहर के ये युवा अपनी हैसियत अनुसार खाना बनाकर गरीब बस्तियों में बॉटने का काम आज भी बदस्तूर जारी रखा है।कई बार इनके सामने बजट की भी समस्या आई पर हौसले और किस्मत इनकी इतनी बुलंद थी कि इन युवाओं की विष्णु रसोई की किसी न किसी ने मदद की है।

जब तक है दम तब तक करेंगे सेवा

विष्णु रसोई के सदस्य उदीप रील बताते है कि लॉक डाउन लगने के बाद से ही उनकी टीम लगातार गरीबो की सेवा में जुटी हुई है अपनी हैसियत के अनुसार खाना बनाकर खिलाने के काम कर रहे है और जब तक दम होगी ये सेवा हम करते रहेंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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