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शिक्षा विभाग के क्लर्क को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, शिक्षक से इस काम के लिए मांगी घूस

Written by:Atul Saxena
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गुरुवार को लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत का परीक्षण किया जिसमें रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सही पाई गई, इसके बाद ट्रैप प्लान किया गया और आज तय प्लनिंग के तहत दोपहर को बीईओ आफिस के बाहर शशिकांत मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। 
शिक्षा विभाग के क्लर्क को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, शिक्षक से इस काम के लिए मांगी घूस

लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने एक भ्रष्ट क्लर्क को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, आरोपी क्लर्क एक शिक्षक से उसकी वेतन वृद्धि लगाने एक बदले 1500 रुपये ले रहा था, पुलिस ने आरोपी क्लर्क के पास से रिश्वत में ली गई राशि बरामद कर ली है।

लोकायुक्त पुलिस ने जबलपुर शिक्षा विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड 2 शशिकांत मिश्रा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है, लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक प्राथमिक शिक्षक नन्हे सिंह धुर्वे  ने एक शिकायती आवेदन उनके कार्यालय में दिया था जिसमें क्लर्क मिश्रा पर रिश्वत मांगे जाने के आरोप लगाये थे।

शिक्षक की वेतन वृद्धि लगाने मांगी रिश्वत 

शिक्षक धुर्वे ने आवेदन में लिखा कि वे जून में बालाघाट से जबलपुर ट्रांसफर होकर आए थे और अभी प्राथमिक विद्यालय पिपरिया में पदस्थ हैं। ट्रांसफर होने के बाद जुलाई में उनकी वेतन बृद्धि होनी थी, लेकिन नहीं की गई और   कई दिनों तक वेतन रोका गया।

बुधवार को शिकायत गुरुवार को भ्रष्ट बाबू गिरफ्तार 

शिक्षक धुर्वे ने जब इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन दिया, यहाँ पदस्थ क्लर्क शशिकांत मिश्रा उनके  इस काम के लिए आनाकानी करने लगा। बाद में उसने दो हजार रुपए रिश्वत की मांग की, सौदा बाद में 1500 रुपए में तय हुआ। परेशान होकर शिक्षक ने जबलपुर लोकायुक्त एसपी से बुधवार को शिकायत की।

BEO ऑफिस के बाहर क्लर्क रंगे हाथ दबोचा 

शिकायत मिलने के बाद गुरुवार को लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत का परीक्षण किया जिसमें रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सही पाई गई, इसके बाद ट्रैप प्लान किया गया और आज तय प्लनिंग के तहत दोपहर को बीईओ आफिस के बाहर शशिकांत मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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