
जबलपुर में स्थित मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर ब्रिज (MP Largest Flyover) इन दिनों विवादों में है। 23 अगस्त को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सीएम मोहन यादव ने इसका उद्घाटन किया था। करीब साढ़े 7 किलोमीटर लंबे 1100 करोड़ रुपये की लागत से बने ब्रिज की व्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। सोमवार को इस मामले में सुनवाई की गई है।
इस फ्लाईओवर का उद्देश्य मदन महल और दमोह नाका के बीच यातायात को सुगम बनाना और यात्रा के समय को कम करना है। लेकिन अब निवासियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसे लेकर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से जो भी मुद्दे उठाएं गए है, फौरन उस पर कार्रवाई करने को कहा गया है। की जाए।
त्योहारों से पहले सुधार का निर्देश
सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह ने आश्वासन दिया है कि फ्लाईओवर पर होने वाले शोर का प्रभाव आसपास के निवासियों पर न हो, इसके लिए व्यू कटर लगाने की सभी संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर भी लिया है। कोर्ट ने त्योहारों के दौरान भीड़ उमड़ने की संभावनाओं को ध्यान में रखते के जल्द से जल्द आश्वासन पर कारवाई करने का निर्देश भी दिया है।
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क्या है मामला?
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट आदित्य संघी ने कहना है कि दमोह नाका से मदनमहल तक सात किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर रेसिडेंशियल इलाके से होकर गुजरता है। जिसके दोनों और एकदम सटकर आवासीय कॉलोनियां लगी है। इसके कारण यहां रहने वालों की प्राइवेसी छीन रही है।
ब्रिज में यू टर्न ना बनाए जाने के चलते लैंडिंग्स एक्सीडेंटल पॉइंट बनते जा रहे हैं। फ्लाईओवर पर मुड़ने के लिए समुचित संकेतक नहीं होने से दिन में कई बार बाटलनेक बन रहे हैं। जिससे जाम लग रहा है। ब्रिज रात को शराबियों का अड्डा बन जाता है, जिसके कारण छेड़छाड़ की घटनाएं भी बढ़ रही है। व्यवस्था को कंट्रोल करने पुलिस बल मौजूद नहीं रहती।
जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट

