कोरोना वायरस: सिर्फ यात्री गाड़ियों का परिचालन बंद, मालगाड़ियों का परिचालन जारी

कोरोना वायरस: सिर्फ यात्री गाड़ियों का परिचालन बंद, मालगाड़ियों का परिचालन जारी

जबलपुर।संदीप कुमार।

रेल्वे ने मीडिया चैनलों के प्रसारण को लेकर अपील की है कि वह हमारा साथ दे। कुछ न्यूज़ चैनलों पर खबर चल रही है कि कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में ट्रेन संचालन को रोक दिया है पर ऐसा नही है।रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर सिर्फ यात्री गाड़ियों के परिचालन को बंद किया है जबकि खाने पीने की जरूरी सामग्रियों के लिए मालगाड़ियों का परिचालन जारी है।

रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की खबर क्षेत्र स्तर पर समस्या पैदा कर रही है। क्योंकि क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को परिपत्र(सर्कुलर) पढ़ने के लिए नहीं मिलता है। उनका मानना ​​है कि सभी ट्रेन सेवाओं को रोक दिया गया है, इसलिए आवश्यक ड्यूटी के लिए आने वाले रेलवे कर्मचारियों को भी रोका जा रहा है।ऐसे में रेलवे ने पुलिस प्रशासन से अनुरोध किया है कि अति आवश्यक ड्यूटी में लगे रेल कर्मचारियों को ना रोका जाए।

मीडिया से रेलवे ने की अपील

पश्चिम मध्य रेलवे की और से मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने निवेदन किया है कि न्यूज़ फ्लैश करें कि आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, रेलवे 24X7 पर काम कर रहा है। हालांकि सभी यात्री ले जाने वाली ट्रेनों को रोक दिया गया है लेकिन अभी भी गुड्स ट्रेनें चल रही हैं।

खाने पीने की वस्तुओं में रेलवे नही आने देगा कमी

कोरोना वायरस के चलते रेल्वे खाद्यान्न, कोयला, पीओएल, दूध, सब्जियां आदि जैसे सामान ले जाकर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं, जो समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में रेलवे अपनी जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से समझता हैं उसके लिए प्रतिबद्ध है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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