जबलपुर में नए संभागायुक्त ने संभाला पदभार, बोले- आदिवासी बाहुल्य जिले में रहेगा विशेष फोकस

जबलपुर में नए संभागायुक्त ने संभाला पदभार, बोले- आदिवासी बाहुल्य जिले में रहेगा विशेष फोकस

जबलपुर।संदीप कुमार

कोरोना वायरस संक्रमण जैसी विषम परिस्थितियों में राज्य सरकार ने जबलपुर रेंज की कमान महेशचंद्र चौधरी को सौपी है।आज पदभार ग्रहण करने के बाद सँभाग कमिश्नर ने कहा कि वर्तमान में देश प्रदेश और संभाग के सामने कोरोना वायरस से निपटने का समय है।

वायरस से लड़ने के लिए ये दी सलाह

संभाग कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी ने कहा कि कोरोना वायरस की रोकथाम के बस एक ही इलाज है कि हम समय पर चेकअप कराए,बेहतर तालमेल रखे और घबराए नही यह सब चीजें यदि हम करते रहेंगे तो निश्चित रूप से कोरोना समस्या से मुक्ति पा सकते है।

आदिवासी बाहुल्य जिले में रहेगा विशेष फोकस

वही रेंज कमिश्नर ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य जिलो में ऐसे समय में पूरा फोकस किया जा रहा है।इन जिलो में रहने वाले मजदूर जो किसी कारणवश कही फसे हुए है उन्हें कैसे लाया जाए इसके लिए जिलो के कलेक्टर को निर्देश दिए गए है वही कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी ने कलेक्टरों को ये भी निर्देश दिए है कि कोई भी मजदूरों से रोजगार न छीना जाए इसकी भी निगरानी की जाए।

जिला पंचायत सीईओ से लेकर संभाग कमिश्नर बनने तक विशेष रहा है जबलपुर से नाता

संभाग कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी का जबलपुर से विशेष नाता रहा है।जिला पंचायत सीईओ रहने के बाद वह निगम आयुक्त,अपर कलेक्टर और कलेक्टर भी जबलपुर में रहे है और अब इस परिस्थिति में राज्य सरकार ने उन्हें संभाग कमिश्नर का दायित्व सौपा है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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