किसान आंदोलन के समर्थन में एनएसयूआई ने निकाला मशाल जुलूस

किसान आंदोलन के समर्थन में एनएसयूआई ने निकाला मशाल जुलूस

जबलपुर, संदीप कुमार| कृषि कानून (Farm Law) के विरोध में करीब 45 दिनों से देश की राजधानी में किसान कड़कड़ाती ठंड में भी डटे हुए हैं| वहीं सरकार और किसानों के बीच बातचीत अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है| कृषि बिल कानून के विरोध में किसानों के समर्थन में अब छात्र संगठन भी उतर आया है, जबलपुर (Jabalpur) में आज एनएसयूआई (NSUI) ने सिविल लाइन से रेलवे स्टेशन तक विशाल मशाल जुलूस निकाला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, एनएसयूआई के मशाल जुलूस में जहां सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे तो वही कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा|

किसानों की सिर्फ एक मांग-काला कानून वापस ले सरकार.
जबलपुर में हुए मशाल जलूस कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के राष्ट्रीय सचिव नीतीश गौड़ मौजूद रहे उन्होंने कहा की केंद्र सरकार के द्वारा देशभर के किसानों को जबरन ही कृषि कानून बिलथोपा जा रहा है जो कि सही नहीं है, उन्होंने कहा कि इस बिल के खिलाफ अब किसानों के साथ साथ देश के छात्र भी खड़े हो गए हैं।

सिविल लाइन से स्टेशन तक निकला मशाल जुलूस, सेकड़ो कार्यकर्ता रहे मौजूद
कृषि कानून बिल और केंद्र सरकार के विरोध में जबलपुर में निकाले गए मशाल जुलूस में एनएसयूआई के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे, आज के इस मशाल जुलूस के दौरान भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने केंद्र सरकार को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर कृषि कानून बिल वापस नहीं लिया जाता तो पूरे देश के छात्र किसानों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल आंदोलन भी करेंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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