फीस वृद्धि और वसूली के विरोध मे अभिभावको ने किया निजी स्कूल के सामने प्रदर्शन

फीस वृद्धि और वसूली के विरोध मे अभिभावको ने किया निजी स्कूल के सामने प्रदर्शन

जबलपुर| संदीप कुमार| जबलपुर में निजी स्कूलों के द्वारा फीस वृद्धि और मनमाने ढंग से लॉक डाउन में तीन माह की एकमुश्त फीस वसूली के विरोध में अभिभावक इन दिनों स्कूलों के सामने लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं| शनिवार को भी सेंट अलोयसियस स्कूल पोलीपाथर के सामने छात्रों के अभिभावकों ने जमकर नारेबाजी की|

दरअसल स्कूल प्रबंधन ने एक फरमान जारी करके स्कूली छात्र छात्राओं से बढ़ी हुई दरों में एक साथ तीन माह की फीस जमा करने कहा था, इस पर अभिभावकों ने नाराजगी जताई थी और स्कूल प्रबंधन से मांग की थी की लॉक डाउन की वजह से उन्हें रियायत दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने किसी भी तरह की छूट देने से इनकार करते हुए जल्द फीस जमा करने के लिए फरमान जारी कर दिया था…सुबह बड़ी तादाद में अभिभावक स्कूल पहुंचे और उन्होंने स्कूल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की लेकिन स्कूल प्रबंधन ने स्कूल के गेट पर ताला डाल दिया और किसी भी अभिभावक को स्कूल के अंदर आने से रोक दिया, इस पर अभिभावक भड़क गए और उन्होंने जमकर नारेबाजी की और प्रबंधन की तानाशाही पर अपना विरोध जताया…अभिभावकों का कहना है कि वे प्रतिवर्ष स्कूल की मनमानी फीस जमा करते आए हैं लेकिन अब बदली हुई परिस्थितियों में स्कूल प्रबंधन को भी फीस के मामले में छूट देना चाहिए, स्कूल प्रबंधन ऐसा नहीं कर रहा है तो अब फीस जमा नहीं करेंगे और यदि स्कूल प्रबंधन छात्रों पर कोई कार्यवाही करता है तो उसके खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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