जबलपुर: नहीं चली यात्री बसें, बस मालिक माने तो अब ड्राइवर-कंडक्टर गए हड़ताल पर

जबलपुर: नहीं चली यात्री बसें, बस मालिक माने तो अब ड्राइवर-कंडक्टर गए हड़ताल पर

जबलपुर, संदीप कुमार| मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकार द्वारा यात्री बसों का 5 माह का टैक्स माफ कर दिए जाने के बाद भले बस ऑपरेटर्स की हड़ताल (Bus Operators Strike) खत्म हो गई हो लेकिन जबलपुर (Jabalpur) में यात्रियों को राहत नहीं मिल सकी|

दरअसल बस ऑपरेटर्स की हड़ताल खत्म होने के बाद आज यहां बस ड्राईवर्स और कंडक्टर्स हड़ताल पर चले गए| बस ऑपरेटर्स अपनी हड़ताल खत्म करने के बाद आज अपनी तमाम बसें चलाना चाहते थे लेकिन ड्राईवर और कंडक्टर्स ने हाथ खड़े कर दिए| बसों के ड्राईवर और कंडक्टर्स ने अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर आज से हड़ताल शुरु कर दी है|

इनकी मांग है कि इन्हें कोरोना लॉकडाउन के बाद से रुके हुए वेतन का पूरा भुगतान किया जाए जिसके अलावा उनके कोरोना संक्रमित होने पर उ्न्हें मुफ्त इलाज की सुविधा या मेडिक्लेम का लाभ दिया जाए| अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर ड्राईवर कंडक्टर्स के हड़ताल पर चले जाने से जबलपुर में आज भी बसों का संचालन नहीं हो सका जिससे यात्री परेशान हो रहे हैं।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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