पुलिस-आबकारी को चकमा देकर नदी पार भागे शराब तस्कर, देखती रह गई टीम

पुलिस-आबकारी को चकमा देकर नदी पार भागे शराब तस्कर, देखती रह गई टीम

जबलपुर, संदीप कुमार| मुरैना जहरीली शराब कांड (Poisonous liqour) के बाद किसी अलसाए अजगर की भांति होश में आए जबलपुर आबकारी विभाग (Jabalpur Excise department) के पदाधिकारियों ने आज शुक्रवार को नर्मदा नदी (Narmada River) किनारे दबिश देकर बड़ी मात्रा में शराब बनाने के लिए रखा महुआ लाहन जब्त किया| हालांकि हर बार की तरह पुलिस-आबकारी को छकाते हुए मुख्य आरोपी नाव में बैठकर पुलिस के सामने से ही फरार हो गया जिसके बाद पुलिसकर्मी अपना पेंट ही मोढ़ते रह गए|

हाल ही में शुरु हुए विशेष अभियान के तहत आबकारी विभाग के अमले ने आज शुक्रवार को नर्मदा तट के किनारे ग्राम समद पिपरिया में कार्यवाही कर एक चढ़ी भट्टी, 625 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब एवं 70 प्लस्टिक डिब्बों में भरा महुआ लाहन लगभग 700 किलोग्राम बरामद किया है|

आबकारी कन्ट्रोल रूम प्रभारी जीएल मरावी के अनुसार भट्टी लगाने वाला व्यक्ति नर्मदा नदी में नाव लेकर दूसरे तरफ फरार हो गए है जिसके बाद अज्ञात व्यक्ति के आबकारी नियम के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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